भूटान में 6 घंटे में बने 108 बौद्ध स्तूप! जानिए PM मोदी से जुड़े 76वें स्तूप की पूरी कहानी

भूटान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खास सम्मान देते हुए गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बने 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों में से 76वां स्तूप उन्हें समर्पित किया है। अब यह स्तूप पीएम मोदी के नाम से जाना जाएगा। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए इस विशेष सम्मान की जानकारी साझा की। 108 स्तूपों का निर्माण पूरा होने के मौके पर राजा वांगचुक और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से एक विशेष तख्ती का अनावरण किया, जिसमें 76वें स्तूप को पीएम मोदी को समर्पित किए जाने का उल्लेख है। पीएम मोदी ने इस सम्मान के लिए भूटान के राजा और जनता का आभार जताते हुए कहा कि यह जंगचुब चोर्टेन भारत-भूटान की साझा आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत के साथ दोनों देशों की दोस्ती का स्थायी प्रतीक रहेगा।

6 घंटे में बने 108 स्तूप
भूटान ने 1 नवंबर 2026 को महज 6 घंटे में 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण कर इतिहास रच दिया। इन्हें स्थानीय भाषा में ‘जंगचुब चोर्टेन’ कहा जाता है। सैकड़ों भिक्षुओं, कारीगरों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने मिलकर इस आध्यात्मिक अनुष्ठान को पूरा किया। ये स्तूप शांति, समृद्धि और सद्भावना के प्रतीक माने जाते हैं। इनका निर्माण भूटान के राजा के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ की आध्यात्मिक नींव के तौर पर किया गया है। यह परियोजना भूटान की पारंपरिक आध्यात्मिकता और ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस को आधुनिक तकनीक, ग्रीन टेक्नोलॉजी और आर्थिक विकास से जोड़ने की परिकल्पना है।

76वें स्तूप की खासियत
इन 108 पवित्र स्तूपों में 76वां स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया गया है। भूटान के शाही सूत्रों के मुताबिक, यह स्तूप गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के केंद्रीय क्षेत्र में स्थित है। इसे भारत-भूटान के गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत रिश्तों के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। भूटान के राजा ने इसे पीएम मोदी की प्रतिबद्धता और गेलेफू सिटी के विजन को साकार करने में भारत के समर्थन के प्रति आभार बताया है। भारत ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, तकनीकी और आर्थिक सहयोग के जरिए अहम भूमिका निभाई है।

बौद्ध धर्म में 108 संख्या का महत्व
बौद्ध धर्म, सनातन संस्कृति और तिब्बती परंपराओं में 108 अंक को बेहद पवित्र माना जाता है। बौद्ध मान्यता के अनुसार, मनुष्य के मन में 108 प्रकार के विकार होते हैं, इसलिए मंत्र जाप और माला में भी 108 का विशेष महत्व है। इसी वजह से भूटान में शांति, समृद्धि और सद्भावना के प्रतीक के तौर पर 108 स्तूप बनाए गए हैं। इन स्तूपों को ‘चोर्टेन’ भी कहा जाता है और इनमें पवित्र मंत्र, धार्मिक ग्रंथ व अवशेष रखे जाते हैं। वहीं ‘जंगचुब चोर्टेन’ का अर्थ ज्ञान प्राप्ति का स्तूप है। यह बोधिचित्त यानी सभी प्राणियों के कल्याण के लिए ज्ञान प्राप्त करने की भावना का प्रतीक माना जाता है।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है?
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के दक्षिण में भारत की सीमा के पास विकसित किया जा रहा एक महत्वाकांक्षी शहर है, जिसे भूटान के राजा की परिकल्पना माना जाता है। इसे देश की भविष्य की आर्थिक राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। शहर में ग्रीन टेक्नोलॉजी, योग, ध्यान, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन पर खास जोर होगा, जबकि प्रदूषणकारी उद्योगों को जगह नहीं दी जाएगी। इस परियोजना में भारत भी अहम साझेदार है। भारत ने सड़क, रेल, एयरपोर्ट, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी के विकास में सहयोग का भरोसा दिया है। भारत के साथ मजबूत कनेक्टिविटी को देखते हुए यह शहर दोनों देशों के रिश्तों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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