भाई-बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते का प्रतीक भाई दूज का त्योहार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में भाई दूज की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि यह पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा या 11 नवंबर को। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
द्वितीया तिथि की शुरुआत 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे होगी और इसका समापन 11 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा। Drikpanchang+1
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भाई को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उनकी आरती उतारती हैं और लंबी उम्र तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बदले भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है।
भाई दूज व्रत की पूजा विधि
अगर बहन शादीशुदा है तो भाई अपनी बहन के घर जाकर भाई दूज मनाएं।
भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर तेल-उबटन आदि करने के बाद स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
फिर सभी देवों की विधिविधान से पूजा करें।
इसके बाद बहनें भाई को टीका करने के लिए एक थाली तैयार करें, जिसमें उन्हें हल्दी, कुमकुम, अक्षत, दीया आदि चीजें रखनी हैं।
फिर इस थाली को भगवान के चरणों में रखें।
इसके बाद बहनें अपने भाई को एक चौकी पर बिठायें। तो वहीं भाई अपने सिर को एक रुमाल या किसी साफ कपड़े से ढंक लें।
फिर भाई को हल्दी, कुमकुम अक्षत से तिलक लगाएं। इसके बाद भाई के हाथ में कलावा बांधें।
फिर अपने भाई को सूखा गोला दें। (अगर आपके यहां भाई दूज पर सूखा गोला देने की परंपरा है तो कलावा बांधने के बाद गोला जरूर दें। अगर ये परंपरा नहीं है तो फिर इसे स्किप कर दें।)
फिर भाई की आरती उतारें।
इसके बाद बहनें भाई का मुंह मीठा करें।
अब भाई बहन को कुछ न कुछ उपहार दें।
इस दिन बहन-भाई साथ में बैठकर भोजन जरूर करें।

