आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से लोगों के बीच अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में ओपनएआई का ChatGPT, Claude और गूगल Gemini जैसे एआई टूल्स की भी जरूरत लोगों में तेजी से बढ़ रही है. लोग अब एआई की मदद से अपने ज्यादातर काम को आसान बना रहे हैं. पढ़ाई से लेकर ऑफिस तक और यहां तक की प्रोग्रामिंग तक के लिए अब लोग एआई की मदद ले रहे हैं. लेकिन अब साइबर ठग भी काफी एडवांस हो चुके हैं. वो अब इसी का फायदा उठाकर लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं. दरअसल, ये फर्जी AI ऐप्स के जरिए यूजर्स के डिवाइस में खतरनाक मालवेयर पहुंचा रहे हैं जिससे लोगों की प्राइवेट जानकारी भी उनतक पहुंच जाती है.
कैसे होती है ठगी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइबर अपराधियों के लिए ये तरीका काफी आसान है. यूजर किसी AI टूल का नया वर्जन, AI असिस्टेंट या कोडिंग एजेंट डाउनलोड करना चाहता है और इसी दौरान उसे असली दिखने वाली फर्जी एप्लिकेशन मिल जाते हैं.
ये फर्जी ऐप सिस्टम में इंस्टॉल होते ही मालवेयर छोड़ देते हैं जिसके बाद साइबर अपराधी आपके डेटा तक पहुंच जाते हैं. बता दें कि इस हमले में साइबर अपराधी आपके पूरे सिस्टम को कंट्रोल भी कर सकते हैं.
इसके अलावा साइबर अपराधियों के निशाने पर डेवलपर्स भी हैं. दरअसल, Agentic AI का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है. इनका इस्तेमाल ज्यादातर डेवलपर्स करते हैं. AI एजेंट को कई बार कंप्यूटर की फाइलें पढ़ने, कोड बदलने, कमांड चलाने और अलग-अलग डेवलपमेंट टूल्स से जुड़ने की परमिशन होती है.
ऐसे में अगर कोई डेवलपर गलती से इनफेक्टेड AI एक्सटेंशन, पैकेज या टूल इंस्टॉल कर लेता है तो उसे बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है.
इस साल सामने आए कई मामले
Kaspersky के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2026 में AI सर्विस के नाम पर करीब 92,000 मालवेयर साइबर अटैक के मामले सामने आए हैं. इनमें लगभग 49 प्रतिशत हमले फर्जी ChatGPT ऐप्स से जुड़े थे, 18 प्रतिशत मामले Claude से जुड़े और 18 ही प्रतिशत मामले Gemini ऐप्स से जुड़े सामने आए हैं.
इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों को रिसर्च के दौरान 15,000 से ज्यादा ऐसे मालवेयर सैंपल भी मिले हैं जिन्हें Agentic AI सॉफ्टवेयर के रूप में पेश किया गया था. इनमें ट्रोजन, स्पाइवेयर जैसे खतरनाक प्रोग्राम भी शामिल थे.
AI ऐप डाउनलोड करते समय रखें सावधानी
सेफ्टी एक्सपर्ट्स हमेला लोगों को सलाह देते हैं कि कोई भी ऐप को इंस्टॉल करने के बाद सिर्फ उसकी सेफ्टी चेक करना ही काफी नहीं होता है. बता दें कि किसी भी AI टूल को डाउनलोड करने से पहले उसके ऑफिशियल सोर्स को जरूर चेक करना चाहिए.
डेवलपर्स को खास तौर पर AI एक्सटेंशन, पैकेज और एजेंट को दी गई permissions पर ध्यान देना चाहिए. कंपनियों को IDE, डेवलपमेंट वर्कस्पेस और एजेंट एक्सेस की निगरानी के साथ ये भी देखना चाहिए कि उनके सिस्टम में बाहरी सॉफ्टवेयर किस तरह एंट्री कर रहा है.





