बांग्लादेश चुनाव में बंपर जीत के बाद बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान ने देश की जनता से एकता बनाए रखने की अपील की. तारिक रहमान ने पार्टी की जीत को उन लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने लोकतंत्र के लिए बलिदान दिया. देश की जनता को संबोधित करते हुए शनिवार (14 फरवरी 2026) को बीएनपी चीफ ने कहा, ‘यह जीत बांग्लादेश की है. यह जीत लोकतंत्र की है. यह जीत उन लोगों की है, जिन्होंने लोकतंत्र की उम्मीद रखी और इसके लिए बलिदान दिया. आज से हम सभी आजाद हैं और अब अधिकारों का असली अर्थ बहाल हो गया है.’
हमें एकजुट होकर रहना होगा: तारिक रहमान
तारिक रहमान ने बांग्लादेश की जनता से कहा, ‘आपकी सहज भागीदारी से डेढ़ दशक से अधिक समय के बाद देश में प्रत्यक्ष मतदान के जरिए संसद और सरकार की फिर से स्थापना हो रही है. हमें एकजुट होकर रहना होगा ताकि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही को पुनः स्थापित नहीं कर सके और राष्ट्र किसी के अधीन न रहे. मैं बांग्लादेश की जनता को बधाई देता हूं. सभी बाधाओं को पार करते हुए आपने देश में लोकतंत्र की स्थापना की है.
‘किसी के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता’
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘सुरक्षित बांग्लादेश के निर्माण के लिए हमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है. इस बार देश के पुनर्निर्माण में सभी को जिम्मेदारी से काम लेना होगा. किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता. कानून व्यवस्था हर कीमत पर कायम रखनी होगी.’
बांग्लादेश में जल्द होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण बहुत जल्द होगा. यानी तय माना जाना चाहिए कि बांग्लादेश को अपनी नई सरकार के लिए तीन दिन से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. लंदन में 17 वर्षों तक स्वनिर्वासन में रहे तारिक रहमान आम चुनाव में बांग्लादेश के नए चेहरे के रूप में उभरे हैं क्योंकि बीएनपी ने बहुमत हासिल कर 20 साल के अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है.
उतार-चढ़ाव भरा रहा तारिक रहमान का राजनीतिक करियर
साल 2004 में शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में तारिक रहमान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. इस हमले में 24 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे. रहमान ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए इनका खंडन किया है. हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासनकाल में उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया था. जब खालिदा जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजा गया तो तारिक रहमान को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नामित किया गया. उनकी मृत्यु के बाद, वह अध्यक्ष बन गए.

