बालेन दाई का काला चश्मा: नेपाल के PM बालेन शाह के सनग्लास का क्या है राज?

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की तस्वीरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर नजर डालें तो उनका एक खास अंदाज तुरंत ध्यान खींचता है—काला चश्मा। चाहे दिन का वक्त हो या रात, सार्वजनिक कार्यक्रम हो या संसद का सदन, बालेन शाह अक्सर अपने सिग्नेचर सनग्लासेस में ही नजर आते हैं। यही वजह है कि उनका काला चश्मा अब सिर्फ आंखों की सुरक्षा का साधन नहीं, बल्कि उनकी पब्लिक इमेज और पहचान का हिस्सा बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर बालेन शाह हर जगह सनग्लास क्यों पहनते हैं और इसके पीछे क्या वजह है? दिलचस्प बात यह है कि उनके इस खास अंदाज को लेकर नेपाल की संसद में भी नियमों में बदलाव की स्थिति बनी। पहले संघीय संसद के भीतर सनग्लास पहनने पर रोक थी, लेकिन बाद में फ़ेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट ने शाह को सदन के अंदर भी उनके सिग्नेचर सनग्लासेस पहनने की अनुमति दे दी। ऐसे में बालेन शाह के काले चश्मे को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। आखिर क्या है उनके सनग्लास पहनने की असली वजह और कब से उनके लुक का यह हिस्सा चर्चा में आया? जानिए नेपाल के प्रधानमंत्री के ‘काले चश्मे’ की पूरी कहानी…

काला चश्मा बना बालेन की सियासी पहचान
बालेन शाह के सनग्लास पहनने को लेकर उनके कार्यालय की ओर से फ़ेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट में एक मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि डॉक्टरों ने उन्हें तेज रोशनी से होने वाली परेशानी के कारण सनग्लास पहनने की सलाह दी है। यह अनुमति ऐसे समय में मिली, जब स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने कुछ दिन पहले ही सांसदों को संसदीय कार्यवाही के दौरान डार्क ग्लास पहनने से बचने का निर्देश दिया था। ऐसे में बालेन शाह के काले चश्मे का मामला महज फैशन या स्टाइल तक सीमित नहीं रह जाता। मेडिकल वजह के साथ-साथ उनका यह सिग्नेचर लुक अब उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक पहचान का भी अहम हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि बालेन शाह का काला चश्मा नेपाल की राजनीति में भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

बालेन शाह को काले चश्मे की ज़रूरत क्यों है?
हाल ही में तेज रोशनी में देखने में परेशानी की शिकायत के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने काठमांडू स्थित बीरेंद्र मिलिट्री हॉस्पिटल में आंखों की जांच कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, नेत्र रोग विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सचित ढकाल ने उन्हें जरूरत पड़ने पर धूप का चश्मा पहनने और आवश्यकता के अनुसार आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करने की सलाह दी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह फेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट को भेजी। सेक्रेटेरिएट के प्रवक्ता एकराम गिरी के मुताबिक, दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि शाह के सनग्लास पहनने के पीछे मेडिकल वजह है और उन्हें खासतौर पर तेज रोशनी में देखने में दिक्कत होती है। वहीं, डिप्टी प्रवक्ता अनंत प्रसाद कोइराला ने भी बताया कि प्रधानमंत्री को सनग्लास पहनने की जरूरत से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट सेक्रेटेरिएट में जमा कराई गई है। ऐसे में अगर तेज रोशनी के कारण मेडिकल तौर पर इसकी जरूरत पड़ती है, तो शाह को संसद की कार्यवाही के दौरान भी सनग्लास पहनने की अनुमति रहेगी। यानी मामला संसद के ड्रेस कोड की अनदेखी का नहीं, बल्कि मेडिकल आधार पर मिली विशेष छूट का है।

नेपाल की संसद में धूप के चश्मे पर रोक क्यों थी?
यह पूरा मामला अगस्त की शुरुआत में उस वक्त चर्चा में आया, जब स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने पार्टी व्हिप को निर्देश दिया कि सदन की कार्यवाही के दौरान सांसद गहरे रंग के धूप के चश्मे न पहनें। स्पीकर ने कहा था कि सदन के भीतर डार्क ग्लास पहनने को लेकर पहले भी सवाल और आलोचनाएं सामने आती रही हैं। इसके बाद संसद ने फैसला किया कि संसदीय कार्यवाही के दौरान ऐसे चश्मे पहनने की अनुमति नहीं होगी, हालांकि मेडिकल कारण होने पर छूट का प्रावधान रखा गया। इसी बीच 26 अगस्त को प्रधानमंत्री बालेन शाह प्रतिनिधि सभा में सांसदों के साथ सीधे सवाल-जवाब सत्र में शामिल हुए। प्रधानमंत्री बनने के बाद सदन के नियमों के तहत यह उनकी पहली ऐसी उपस्थिति थी, जिसमें कुल 11 सांसदों ने उनसे सवाल पूछने के लिए नाम दर्ज कराया था। शाह की संसद में यह मौजूदगी ऐसे समय हुई, जब सदन की बैठकों में उनकी अनुपस्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। सांसदों की ओर से चिंता जताए जाने के बाद स्पीकर ने भी प्रधानमंत्री को सदन के सामने उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया था।

बालेन शाह के धूप के चश्मे
36 वर्षीय रैपर से राजनेता बने बालेन शाह के लिए आयताकार काले चश्मे लंबे समय से उनकी पहचान का हिस्सा रहे हैं। काठमांडू के मेयर रहते हुए भी वह ज्यादातर इसी अंदाज में नजर आते थे और राजनीति में सक्रिय होने के बाद भी बिना काले चश्मे के उनकी तस्वीरें बेहद कम ही देखने को मिलीं। अक्सर काले कपड़ों के साथ नजर आने वाला उनका यह लुक उन्हें नेपाल की पारंपरिक राजनीति से अलग एक नए और बेबाक चेहरे के तौर पर पेश करता रहा है। धीरे-धीरे यह स्टाइल उनके समर्थकों के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे “बालेन दाई को चश्मा” कहा जाने लगा। काठमांडू में उनके जैसे आयताकार काले फ्रेम वाले चश्मों की मांग भी बढ़ी और कई दुकानों पर इन्हें “बालेन सनग्लासेज़” के नाम से पहचाना जाने लगा। अब मेडिकल सलाह के आधार पर उन्हें संसद के भीतर भी अपने सिग्नेचर सनग्लास पहनने की अनुमति मिल गई है। यानी काठमांडू की सड़कों से लेकर मेयर और प्रधानमंत्री के पद तक बालेन शाह के साथ नजर आने वाला यह काला चश्मा अब उनकी राजनीतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है। ऐसे में संसद में उनकी मौजूदगी के दौरान लोगों की नजर सिर्फ उनके बयानों पर नहीं, बल्कि उनके इस सिग्नेचर लुक पर भी रहेगी।

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