Ashadh Maas 2026: आषाढ़ में कब पड़ेंगी दोनों त्रयोदशी तिथियां? जानें प्रदोष व्रत की डेट और शुभ समय
30 जून 2026 को सुबह 5:26 बजे से आषाढ़ मास का आरंभ हो चुका है। यह पवित्र महीना 29 जुलाई 2026 को रात 8:05 बजे समाप्त होगा। हिंदू धर्म में आषाढ़ का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इस पूरे महीने में भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, दोनों में त्रयोदशी तिथि पड़ती है। त्रयोदशी को आम भाषा में ‘तेरस’ भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आप भी आषाढ़ 2026 में पड़ने वाली दोनों त्रयोदशी तिथियों की सही तारीख, शुभ समय और प्रदोष व्रत का महत्व जानना चाहते हैं, तो आगे पूरी जानकारी पढ़ें।
आषाढ़ मास 2026 में तेरस कब-कब है?
•आषाढ़ 2026 की पहली तेरस तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई 2026 को सुबह 2:04 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 10:29 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में आषाढ़ की पहली तेरस 12 जुलाई को पड़ेगी। इस दिन भगवान शिव को समर्पित रवि प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा।
•आषाढ़ 2026 की दूसरी तेरस तिथि
द्रिक पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी 26 जुलाई 2026 को दोपहर 1:57 बजे शुरू होगी और 27 जुलाई को दोपहर 4:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 26 जुलाई को आषाढ़ मास की दूसरी तेरस मानी जाएगी। इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ रवि प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा।
रवि प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल का समय
•12 जुलाई 2026- शाम 07:22 से रात 09:24 मिनट तक
•26 जुलाई 2026- शाम 07:16 से रात 09:21 मिनट तक
त्रयोदशी तिथि का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी (तेरस) भगवान शिव की प्रिय तिथियों में से एक मानी जाती है। इस दिन प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा और व्रत करने से सुख-समृद्धि, कष्टों से राहत और कर्ज से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, कामदेव की पूजा करने से दांपत्य और प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ने तथा आत्मविश्वास व आकर्षण में वृद्धि होने की मान्यता है।
