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Yoga Day 2026: पेट और कमर की चर्बी करना है कम? तो रोज करें ये पांच योगासन

Yoga Day 2026: क्या आपको अक्सर आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है? क्या मेहनत के बावजूद मान-सम्मान और सफलता उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रही? ज्योतिष शास्त्र में ऐसी कई स्थितियों को कमजोर सूर्य से जोड़कर देखा जाता है. सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है, जो व्यक्ति की ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता, आत्मबल और प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है. पुराने समय से ही सूर्य उपासना को खास महत्व दिया जाता है.

21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें उन योग परंपराओं की याद दिलाता है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करती हैं. इन्हीं में सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली अभ्यास है सूर्य नमस्कार, यह केवल एक योगासन नहीं, बल्कि 12 योग मुद्राओं(Pose) का योग है जिसमें 12 योग मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका रोजाना अभ्यास शरीर और मन दोनों को बेहतर बनाने में मदद करता है.

रोज सूर्य नमस्कार करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में पॉजिटिविटी बढ़ती है. सुबह के समय खाली पेट सूर्य नमस्कार करना सबसे लाभकारी माना जाता है. शुरुआती लोग 5 से 6 चक्र से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे संख्या बढ़ा सकते हैं

आखिर क्या है सूर्य नमस्कार, जिसे संपूर्ण योग अभ्यास माना जाता है?

सूर्य नमस्कार संस्कृत के दो शब्दों “सूर्य” और “नमस्कार” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है सूर्य देव को प्रणाम करना. इसमें 12 अलग-अलग योग मुद्राओं को एक विशेष क्रम में किया जाता है. यह शरीर, श्वास और मन के बीच तालमेल स्थापित करने का एक संपूर्ण अभ्यास माना जाता है.

सूर्य नमस्कार की 12 योग मुद्राएं:-

ज्योतिष में सूर्य नमस्कार का महत्व:

  1. प्रणामासन (Prayer Pose)- दोनों हाथ जोड़कर सीधे खड़े होकर सूर्य को प्रणाम किया जाता है.
  2. हस्त उत्तानासन (Raised Arms Pose)- हाथों को ऊपर उठाकर शरीर को पीछे की ओर हल्का झुकाया जाता है.
  3. पदहस्तासन (Standing Forward Bend)- कमर से झुककर हाथों को पैरों के पास जमीन की ओर ले जाया जाता है.
  4. अश्व संचलनासन (Equestrian Pose)- एक पैर पीछे ले जाकर सामने वाले घुटने को मोड़ते हुए ऊपर देखा जाता है.
  5. दंडासन (Plank Pose)- दोनों पैरों को पीछे ले जाकर शरीर को सीधी रेखा में रखा जाता है.
  6. अष्टांग नमस्कार (Eight-Limbed Salute)- घुटने, छाती और ठुड्डी को जमीन पर टिकाकर प्रणाम की मुद्रा बनाएं.
  7. भुजंगासन (Cobra Pose)- शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाकर पीछे की ओर मोड़ा जाता है.
  8. पर्वतासन (Mountain Pose)- कूल्हों को ऊपर उठाकर शरीर को उल्टे V आकार में लाया जाता है.
  9. अश्व संचलनासन- अब दूसरा पैर आगे लाकर चौथे चरण की मुद्रा दोहराई जाती है.
  10. पदहस्तासन- फिर से आगे झुककर हाथों को पैरों के पास लाया जाता है.
  11. हस्त उत्तानासन- शरीर को ऊपर उठाकर हाथों को पीछे की ओर ले जाया जाता है.
  12. प्रणामासन- आखिरी में प्रारंभिक स्थिति में आकर हाथ जोड़ लिए जाते हैं.

वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मविश्वास, पिता, सरकारी क्षेत्र, नेतृत्व क्षमता, यश और जीवन शक्ति की वजह माना जाता है. जब सूर्य मजबूत होता है तो व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और आकर्षण बढ़ता है. इसलिए कई ज्योतिषाचार्य रोजाना सूर्य नमस्कार को सूर्य शक्ति बढ़ाने वाला अभ्यास मानते हैं.

सूर्य नमस्कार के प्रमुख फायदे:-

आत्मविश्वास और पॉजिटिविटी बढ़ाने में मददगार: रोज सूर्य नमस्कार करने से मानसिक मजबूती बढ़ सकती है और पॉजिटिव सोच विकसित होने में मदद मिलती है.
शरीर को शक्तिशाली बनाता है: यह पूरे शरीर की मांसपेशियों को चुस्त करता है, जिससे दिनभर ताजगी और स्फूर्ति बनी रहती है.
वजन को संतुलित रखने में सहायक: सूर्य नमस्कार एक प्रभावी फुल-बॉडी एक्सरसाइज है, जो कैलोरी बर्न करने और फिटनेस बनाए रखने में मदद कर सकता है.
हृदय और फेफड़ों के लिए फायदेमंद: नियमित अभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है और श्वसन तंत्र(Respiratory system) को भी लाभ मिलता है.
तनाव और चिंता कम करने में सहायक: योग और सीमित श्वास का अभ्यास मन को शांत रखता है और तनाव को कम करने में मदद करता है.

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