अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सयद की जीत ने नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति बनने का दावा किया है। उनकी जीत पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने खुशी जताते हुए इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि मिशिगन में एक अब्दुल जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी। ओवैसी ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि अब वक्त आ गया है जब ‘अब्दुल’ को तंज बनाने वालों को जवाब दिया जाए और अब दरी बिछाने का दौर खत्म हो।
अब्दुल अल-सैयद के बारे में
अब्दुल अल-सयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने रोड्स स्कॉलरशिप के तहत ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने सारा जकाकू से शादी की है, जिनका परिवार भारतीय मूल का है। अल-सयद खुद को पूंजीवादी बताते हैं। उनके चुनाव प्रचार में महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर खास जोर रहा। उनके अभियान में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के पिछले साल के चुनाव प्रचार की झलक भी देखने को मिली।
मेडिकेयर से लेकर इजरायल नीति तक, इन मुद्दों के दम पर अब्दुल अल-सयद ने की सियासत में वापसी
अब्दुल अल-सयद ने अपने चुनाव प्रचार में कई अहम मुद्दों को उठाया। इनमें सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने वाली ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ योजना, इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता बंद करना और चुनावी फंडिंग में सुधार शामिल रहे। इससे पहले 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर के हाथों 20 फीसदी से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद उन्होंने कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि, इस दौरान वह पॉडकास्ट, किताब लेखन और यूट्यूब व टेलीविजन के जरिए लगातार सार्वजनिक चर्चा में बने रहे। इसके करीब सात साल बाद उन्होंने एक बार फिर चुनावी राजनीति में वापसी की।

