महिलाओं की सुरक्षा और आज़ादी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर सियासी चर्चा तेज हो गई है। बिहार के जमुई में दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित बदसलूकी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने इसे संस्कृति नहीं, बल्कि पितृसत्तात्मक सोच से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने बिहार सरकार से पूछा कि शाम के समय एक लड़की सड़क पर सुरक्षित क्यों नहीं है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस बीच दिल्ली में सामने आए महिला सुरक्षा से जुड़े एक अलग मामले को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस नेताओं ने इन घटनाओं को महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी स्वतंत्रता से जोड़कर सरकारों से जवाबदेही की मांग की है।
वहीं, महिलाओं को घर या सीमित दायरे में रखने वाली सोच को लेकर राहुल गांधी ने अगस्त में पुणे के एक कार्यक्रम में भी अपनी बात रखी थी। वायरल हुए एक वीडियो के संदर्भ में फैक्ट-चेक रिपोर्टों ने स्पष्ट किया कि उसमें सुनाई देने वाली कुछ पंक्तियां राहुल गांधी के अपने विचार नहीं, बल्कि उनके द्वारा दूसरे नेताओं के पुराने बयानों का संदर्भ थीं। उसी भाषण में उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता और अपने फैसले खुद लेने के अधिकार की बात कही थी।
अब जमुई मामले पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद महिला सुरक्षा और स्वतंत्रता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

