नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है। माता के वस्त्र सफेद हैं और उनका वाहन वृषभ यानी बैल है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और माता की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मां को सफेद फूल, फल, मिठाई और नारियल अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, भोग और पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।
नवरात्रि की अष्टमी पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। इस परंपरा में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी की तिथि को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अंतर दिखाई दे सकता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, महाष्टमी 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
मां महागौरी की पूजा का यह दिन श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देता है।
माता महागौरी के सिद्ध मंत्र एवं उनका अर्थ
1. माता महागौरी बीज मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
2. माता महागौरी प्रार्थना मंत्र
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
मंत्र का सरल भावार्थ: जो पवित्र देवी श्वेत वस्त्र धारण करके श्वेत वृषभ (बैल) पर विराजमान हैं और देवाधिदेव महादेव को आनंद प्रदान करने वाली हैं, वे माता महागौरी हमारे जीवन में समस्त शुभ फल और मंगल प्रदान करें।
3. मंत्र जप का महत्व एवं विधि
नवरात्रि के आठवें दिन रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से माता के मंत्रों का कम से कम 108 बार नाम जप करने से चित्त के दोष समाप्त होते हैं, नकारात्मकता दूर होती है और परिवार में ऐश्वर्य तथा शांति का संचार होता है।
माता महागौरी स्तुति एवं ध्यान मंत्र
स्तुति:
या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥
माता महागौरी स्तोत्र पाठ
सर्वसङ्कट हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
माता महागौरी कवच मंत्र
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम् घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥

