पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा. इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल अंचल के 5 जिले शामिल हैं. पहले चरण के दौरान मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होगा, जो शाम 6 बजे तक जारी रहेगा. हालांकि, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से समय थोड़ा बदला जा सकता है (जैसे शाम 5 बजे तक), लेकिन सामान्य तौर पर 7 बजे से मतदान शुरू होता है.
पहले चरण में ज्यादातर दक्षिण और पश्चिम बंगाल के जिले शामिल हैं. इनमें पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले आते हैं. इसके अलावा कोलकाता और हावड़ा की कुछ सीटों पर भी इसी चरण में मतदान होगा. इन इलाकों में कई ऐसी सीटें हैं जो काफी चर्चा में रहती हैं और राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. जैसे नंदीग्राम, खड़गपुर, पुरुलिया, बांकुरा और झाड़ग्राम. इन सीटों पर आमतौर पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है
पहले चरण ता चुनाव क्यों है खास?
पहले चरण को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह पूरे चुनाव का माहौल तय करता है. यहां के नतीजों से यह अंदाजा लगने लगता है कि आगे के चरणों में किस पार्टी को बढ़त मिल सकती है. खासकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है. इसके अलावा, इस चरण में आने वाले कई इलाके ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र हैं, जहां वोटिंग का तरीका और मुद्दे बाकी शहरों से अलग होते हैं. इसलिए यहां का मतदान पैटर्न भी अलग नजर आता है और यह चुनाव को दिलचस्प बना देता है.
पश्चिम बंगाल की हॉट सीट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई ऐसी सीटें हैं जो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं और इन्हें हॉट सीट माना जा रहा है. इन सीटों पर बड़े नेताओं की साख दांव पर है और मुकाबला काफी कड़ा देखने को मिल रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर सीट की हो रही है. यह सीट बहुत अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं. उनके सामने बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी हैं, जिससे यह मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प हो गया है. इसे सत्ता और प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है.
पानीहाटी सीट सुर्खियों में
पानीहाटी सीट भी इस बार सुर्खियों में है. यह सीट उत्तर 24 परगना जिले में आती है. हाल में हुए एक बड़े आपराधिक मामले के बाद यह सीट चर्चा में आई. बीजेपी ने यहां पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि टीएमसी की तरफ से तीर्थंकर घोष मैदान में हैं. इस वजह से यहां चुनाव भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बन गया है. नंदीग्राम सीट भी एक बार फिर केंद्र में है. यह इलाका पहले ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन अब यहां सुवेंदु अधिकारी की चुनौती के कारण मुकाबला बहुत कड़ा हो गया है. इस सीट पर हर किसी की नजर बनी हुई है. मालदा और मुर्शिदाबाद जिले की कई सीटें भी इस बार खास हैं. यहां मुकाबला सीधा नहीं बल्कि तीन तरफा हो गया है, क्योंकि कांग्रेस भी अलग से चुनाव लड़ रही है. टीएमसी का दबदबा होने के बावजूद मुकाबला दिलचस्प और अनिश्चित माना जा रहा है.

