हमनी के नाय, सिर्फ पईसा वाला के होअत बा कोरोना… पढ़ें एक गांव की हकीकत

Special Report झारखण्ड

कोरोना वायसरस महामारी को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग ब्रेफिक्र हैं। सामान्य दिनों की तरह लोग बगैर मास्क व शारीरिक दूरी का अनुपालन करते जहां-तहां घूम रहे हैं। गप्पेबाजी भी हो रही है। लोग दैनिक दिनचर्या में लगे हैं। चौक चौराहों पर बगैर मास्क लगाए युवकों की टोली जुट रही है। ताश के पत्ते फेंके जा रहे हैं। झुंड बनाकर लोग पशु चराने के लिए निकल रहे हैं। शहर में आंशिक लाॅकडाउन लगने से दोपहर दो बजे के बाद सड़क पर सन्नाटा पसर जा रहा है। मगर ग्रामीण क्षेत्र में लोग इससे अनभिज्ञ हैं।

दो बजे के बाद भी विभिन्न चौक-चाैराहों पर लोगों का जमावड़ा लग रहा है। हर कोई अपने काम में मस्त है। ऐसा लग रहा है जैसे मात्र शहर में ही कोरोना को लेकर हायतौबा मची है। गांव में तो इसका असर देखने को ही नहीं मिल रहा है। यह हाल गढ़वा प्रखंड के मधेया पंचायत का है। 7 हजार 500 की जनसंख्या वाले इस पंचायत में सात गांव हैं। मधेया गांव में पंचायत भवन है। पूर्व में यहां क्वारंटाइन सेंटर काम करता था मगर वर्तमान में यह बंद पड़ा हुआ है।

यहां कोई भी आइसोलेशन में नहीं है। पूरे पंचायत में मात्र पांच लोग ही कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित पाए गए हैं। इस पंचायत के एक व्यक्ति की मौत लखनऊ में हो चुकी है। उक्त व्यक्ति लखनऊ में ही रहता था। मधेया गांव के भ्रमण के दौरान गांव के सुरजेश चौधरी मिले। वह बगैर मास्क पहने डंडा लेकर भैंस चरा रहे थे। तेज धूप होने के कारण भैंसों को चरने के लिए छोड़कर पेड़ की छांव में आराम करने के लिए बैठ गए। जब उनसे पूछा गया कि पंचायत में कोरोना का क्या हाल है।

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तब उन्होंने तपाक से जवाब दिया। ए बाबू ई कोरोना सिर्फ पईसा वाला के होअत बा…। मेहनत मजदूरी करे वाला पास नहीं आवत बा…। गांव में कुछ लोग के होईल ऊ भी ठीक हो गईलन…। इसी प्रकार हूर चौक पर चार पांच युवा गप्पे हांक रहे थे। उन्होंने भी मास्क नहीं पहन रखी थी। पूछने पर उन्होंने बताया कि गांव में कोरोना नहीं है। सिर्फ शहर में ही है। पता करने पर जानकारी मिली कि पंचायत में कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं है। लोग जांच नहीं करा रहे हैं, इसलिए संक्रमित नहीं मिल रहे हैं।

कुछ लोग लक्षण मिलने पर सदर अस्पताल जाकर जांच कराते हैं। ऐसे में यह बात स्पष्ट हो गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच की अनदेखी की जा रही है। जांच नहीं होने के कारण सर्दी, खांसी एवं बुखार से पीड़ित लोग की बीमारी पकड़ में नहीं आ रही है। यह अनदेखी कभी भी भारी पड़ सकती है। इस पंचायत में टीकाकरण की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए बगल के पंचायत तिलदाग या फिर सदर अस्पताल आना पड़ रहा है।

सरकार पंचायतों को अधिकार दे। कोरोना महामारी पर नियंत्रण में पंचायत अहम भूमिका निभा सकते हैं। सरकार को पंचायतों को फंड उपलब्ध कराना चाहिए। साथ ही क्वारंटाइन सेंटर, आइसोलेशन सेंटर बनाते हुए लोगों को सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। ग्राम पंचायत टीकाकरण एवं कोरोना जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना का प्रसार नहीं हो, इसको लेकर नियमित जांच की जरूरत है। वर्तमान में मधेया पंचायत में मात्र पांच कोरोना संक्रमित ही मिले हैं। इसको लेकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है।

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