यूपी में चुनाव से पहले प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू, क्या BJP पर दबाव बना रहे हैं संजय निषाद? माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात के क्या हैं मायने

यूपी में भाजपा के साथ सरकार में बने रहने वाले संजय निषाद ने सपा नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद यूपी चुनाव से पहले अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के जरिए संजय निषाद बीजेपी पर ज्यादा सीटों के लिए प्रेशर बनाना चाहते हैं।

लखनऊ: यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कई तरह की सियासी अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। संजय निषाद ने बीजेपी के महामंत्री, संगठन धर्मपाल सिंह से भी मुलाकात की। संजय निषाद की ये दोनों मुलाकातें कल लखनऊ में हुईं। बता दें कि यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर संजय निषाद ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में संजय निषाद की पार्टी 16 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिसमें 10 सीट पर निषाद पार्टी के सिम्बल पर और 6 सीट पर बीजेपी के सिम्बल पर चुनाव लड़ा गया।

संजय निषाद ने माता प्रसाद से की थी मुलाकात हालांकि राजनीतिक अटकलों के बीच संजय निषाद ने सफाई पेश करते हुए माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार भेंट बताया। इससे पहले विनोद साहनी की हत्या के विरोध में संजय निषाद लखनऊ और गोंडा में धरने पर भी बैठ चुके हैं। वो निषाद समाज के लिये 9 फीसदी आरक्षण की मांग भी उठाते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि संजय निषाद ज्यादा सीट पाने के लिए बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं।

विधानसभा चुनाव से जोड़कर निकाले जा रहे मायने यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव है। संजय निषाद का अपनी ही पार्टी के खिलाफ धरने पर बैठना और नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मिलने को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। संजय निषाद ने इंडिया टीवी से कहा कि वो चाहते हैं कि बीजेपी उन्हें ज़्यादा सीट दे। अभी बीजेपी ने दरवाजे बन्द नहीं किएं हैं, जब करेगी तब सोचा जाएगा।

यूपी चुनाव में निषाद वोट का कितना है असर?

बता दें कि यूपी में करीब चार फीसदी निषाद वोट है। गंगा नदी के किनारे करीब 16 जिलों में निषाद वोट है। करीब 100 विधानसभा सीटों पर निषाद वोट का असर देखने को मिलता है। गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, मिर्ज़ापुर, प्रयागराज और वाराणसी में निषाद वोट ज़्यादा हैं। एक सर्वे के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनाव में करीब 63 फीसदी निषादों ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को वोट दिया था, जबकि 22 फीसदी निषादों ने सपा और उसके सहयोगी दलों को वोट किया था। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में संजय निषाद बीजेपी को कई सीट पर निषाद वोट नहीं दिला पाए। संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ख़ुद चुनाव हार गए थे।

संजय निषाद की पार्टी का सफर

संजय निषाद ने 2016 में निषाद पार्टी बनाई थी। निषाद पार्टी ने 2017 का विधानसभा चुनाव पीस पार्टी के साथ मिलकर लड़ा। पार्टी ने 72 उम्मीदवार उतारे और एक सीट पर जीत हासिल की। समाजवादी पार्टी ने 2018 में गोरखपुर में हुए उपचुनाव में निषाद पार्टी से संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को टिकट दिया और प्रवीण निषाद ने बीजेपी से सीट छीन ली। लेकिन संजय निषाद ने 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया और अब सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

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