1 महीने में टूटा US-Iran शांति समझौता! जानिए किन रेड लाइन को पार कर युद्ध के मुहाने पर पहुंचे दोनों देश

17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। उम्मीद थी कि इससे दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव कम होगा, लेकिन यह समझौता ज्यादा समय तक टिक नहीं सका। समझौते के महज एक सप्ताह बाद, 25 जून को ईरानी ड्रोन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजर रहे एक कार्गो जहाज को निशाना बनाया। इसके बाद शुरू हुई जवाबी कार्रवाई और हमलों की श्रृंखला ने हालात को लगातार बिगाड़ दिया।
पिछले एक महीने में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई ऐसे कदम उठाए, जिन्हें संघर्ष की बड़ी “रेड लाइन” माना जा रहा है। हर नए हमले और उसके जवाबी पलटवार ने शांति समझौते को और कमजोर कर दिया। अब हालात ऐसे हैं कि ईरान और अमेरिका के सहयोगी देशों के डीसैलिनेशन प्लांट जैसे महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे भी हमलों की चपेट में आने लगे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।
इस लेख में विस्तार से जानिए कि 17 जून के शांति समझौते के बाद अमेरिका और ईरान ने कौन-कौन सी रेड लाइन पार कीं, किन घटनाओं ने हालात को युद्ध के मुहाने तक पहुंचाया और आखिर एक महीने के भीतर दोनों देशों के बीच तनाव इतनी तेजी से कैसे बढ़ गया।

ईरान की तरफ से जो रेड लाइन क्रॉस की गईं
1.अंतरिम शांति समझौते के बाद भी ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।
2.ईरान ने उन जहाजों पर भी हमले किए जो अमेरिका की ओर से सुझाए गए ओमान वाले सुरक्षित वैकल्पिक शिपिंग रूट का इस्तेमाल कर रहे थे।
3.संघर्ष विराम की भावना के विपरीत, ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए होर्मुज क्षेत्र में लगातार सैन्य कार्रवाई जारी रखी।
4.ईरानी हमलों का दायरा बढ़ाते हुए अमेरिका के सहयोगी देशों—बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर—को भी निशाना बनाया गया।
5.कमर्शियल शिप्स पर लगातार हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हुआ।
6.कुवैत के डिसैलिनेशन प्लांट पर हमले के बाद संघर्ष का असर नागरिक बुनियादी ढांचे तक पहुंच गया, जिससे पेयजल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुईं।
7.कतर की मध्यस्थता से शांति बहाल करने की कोशिशों के बावजूद ईरान ने सैन्य गतिविधियां और हमले जारी रखे, जिससे तनाव और बढ़ गया।

रेड लाइन जो अमेरिका की तरफ से क्रॉस की गईं
1.अंतरिम शांति समझौते के बावजूद अमेरिका ने ईरान के भीतर कई बार हवाई हमले कर सैन्य दबाव बनाए रखा।
2.अमेरिकी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों, ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों के साथ-साथ रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकानों को प्रमुख निशाना बनाया गया।
3.अमेरिका ने समझौते के आर्थिक प्रावधानों से पीछे हटते हुए ईरान को दी गई तेल निर्यात की छूट वापस ले ली और तेल कारोबार से जुड़े प्रतिबंध दोबारा लागू कर दिए।
4.शांति समझौते के तहत हटाई गई ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को अमेरिका ने फिर से लागू कर दिया।
5.सैन्य ठिकानों के अलावा अमेरिका ने पुलों, पावर स्टेशनों और अन्य रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर भी हमले किए।
6.होर्मुज स्ट्रेट में अपनी मौजूदगी और नियंत्रण बढ़ाने की अमेरिकी कोशिशों को ईरान ने अपने दावों के लिए सीधी चुनौती माना।
7.पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के अस्तित्व को लेकर दी गई कड़ी चेतावनियों के बाद संघर्ष और तेज हुआ तथा दोनों पक्षों के बीच नागरिक बुनियादी ढांचे भी हमलों के दायरे में आ गए।

17 जून से 18 जुलाई तक क्या-क्या हुआ?
•17 जून: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
•25 जून: समझौते के महज एक सप्ताह बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक वाणिज्यिक कार्गो जहाज पर हमला किया, जिससे संघर्ष फिर भड़क उठा।
•26 जून: जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल ठिकानों के साथ तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक की।
•27 जून: ईरान ने ओमान की ओर वाले वैकल्पिक शिपिंग रूट से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर हमला कर समुद्री तनाव और बढ़ा दिया।
•4 जुलाई: ईरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
•6 से 11 जुलाई: अमेरिका ने कई चरणों में हवाई अभियान चलाकर ईरान के 300 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इसी अवधि में ईरान ने तीन अन्य वाणिज्यिक जहाजों पर भी हमले किए।
•12 से 14 जुलाई: अमेरिका ने एक बार फिर होर्मुज क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी (नेवल ब्लॉकेड) लागू करने की घोषणा की।
•15 से 16 जुलाई: अमेरिका ने ईरान के निगरानी केंद्रों, रडार सिस्टम और ड्रोन-मिसाइल भंडारों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
•17 जुलाई: अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक पुलों और जल शोधन (वॉटर ट्रीटमेंट) संयंत्रों पर हमले किए। वहीं, ईरान ने कतर और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला किया और कुवैत के जल संयंत्र को नुकसान पहुंचाया।
•18 जुलाई: ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर हमला किया, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर रातभर हवाई हमले किए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1