TMC के नाम और सिंबल विवाद पर राहुल गांधी के बाद केजरीवाल और संजय राउत भी ममता के समर्थन में उतरे. शिवसेना-NCP विवाद का हवाला देकर विपक्षी दलों ने EC के फैसले पर सवाल उठाए.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग (EC) के अंतरिम आदेश के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे चुनाव आयोग और बीजेपी पर सवाल उठाए हैं. अब आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि राहुल गांधी ने सिर्फ TMC ही नहीं शिवसेना और NCP के पुराने विवादों का भी जिक्र किया
दरअसल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठनात्मक विवाद पर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले ने राष्ट्रीय राजनीति में नया सियासी मुद्दा खड़ा कर दिया है. 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों (ममता बनर्जी और अरूप रॉय) को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया. दोनों गुटों से नए नाम और फ्री सिंबल के विकल्प मांगे गए हैं.
राहुल बोले- हर जगह एक जैसा पैटर्न
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ये अंतरिम व्यवस्था है और पैरा 15 के तहत मूल विवाद पर अंतिम निर्णय बाद में होगा और इसी फैसले के बाद विपक्षी राजनीति में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया. राहुल गांधी ने इस फैसले को सिर्फ TMC का संगठनात्मक विवाद नहीं माना. उन्होंने कहा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC… राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हर बार एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है.
राहुल गांधी- ये पार्टी चोरी
राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनका चुनाव चिन्ह छीनने का काम कर रहे हैं.’ राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी और पार्टी चोरी से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है. राहुल का संदेश सिर्फ ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है. उन्होंने उन तमाम क्षेत्रीय दलों के पुराने विवादों को भी एक साथ जोड़ दिया, जिनमें पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर लड़ाई हुई.
AAP ने राहुल का किया समर्थन
दिलचस्प ये है कि जिस मुद्दे पर राहुल गांधी ने आवाज उठाई, उस पर आम आदमी पार्टी (AAP) की तरफ से भी समर्थन सामने आया है. AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा. पिछले दिनों ही AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पाला बदला था. राघव चड्ढा, हरभंजन सिंह समेत 7 सांसदों ने बीजेपी का ददामन थाम लिया था. इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाया था.
ममता के समर्थन में संजय राउत
इस बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के नेता संजय राउत ने भी ट्वीट करके संजय राऊत कहा, ‘भारत की राजनीति में महाराष्ट्र और मराठी नेतृत्व की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है… ममता बनर्जी ने अपने संघर्ष, मेहनत और ताकत के दम पर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और उसे आगे बढ़ाया.. राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.. जिस तरह शिवसेना बालासाहेब ठाकरे की पार्टी थी और एनसीपी शरद पवार की पार्टी है, उसी तरह तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है…’
अमित शाह पर आरोप
बीजेपी पर आरोप लगाते हुए संजय राउत ने कहा, ‘अमित शाह पार्टियों को तोड़ने, विधायकों और सांसदों को खरीदने और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने का काम किया जा रहा है.’ राउत ने कहा कि मूल पार्टी का अस्तित्व और उसका चुनाव चिह्न बरकरार रहना चाहिए. उन्होंने दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि इसके प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है. उनके मुताबिक, शिवसेना और शरद पवार की NCP के मामले में भी मूल पार्टी के अस्तित्व को लेकर विवाद सामने आया है.
‘TMC की असली हकदार ममता बनर्जी’
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिह्न को लेकर राउत ने कहा कि इसे फ्रीज करने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि पार्टी ममता बनर्जी की है. उन्होंने कहा कि चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में ममता बनर्जी को राहत मिलनी चाहिए और मूल पार्टी के हाथ में उसका चुनाव चिह्न रहना चाहिए. संजय राउत ने कहा कि नेता भले ही अच्छा हो, लेकिन पार्टी की मालिक और उसके चुनाव चिह्न की असली हकदार ममता बनर्जी हैं और उन्हें ही रहना चाहिए.
ममता से मिलीं कनिमोझी
17 सितंबर को DMK सांसद कनिमोझी ने ममता बनर्जी से कोलकाता में मुलाकात की. इससे पहले कनिमोझी ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने शरद पवार की पार्टी NCP (SP) से जुड़े नेताओं से भी बातचीत की. इन बैठकों में परिसीमन और विपक्षी दलों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानकारी सामने आई है. शरद पवार को लेकर पिछले कुछ महीनों में NDA के साथ जाने की अटकलें जरूर चलीं, लेकिन अभी तक वो INDIA का ही हिस्सा हैं.
असल सवाल क्या?
TMC पर आए फैसले के बाद विपक्ष के नेताओं की बयानबाजी से साफ है कि अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि TMC को नाम और सिंबल कब मिलेगा… सवाल ये भी है कि क्या चुनाव आयोग के फैसले ने विपक्षी दलों को एक ऐसा मुद्दा दे दिया है, जिस पर कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां एक साथ आवाज उठा सकती हैं? एक तरफ राहुल गांधी TMC के मुद्दे को शिवसेना और NCP के पुराने विवादों से जोड़ रहे हैं… दूसरी तरफ AAP की ओर से भी समर्थन के संकेत हैं… और तीसरी तरफ DMK की कनिमोझी क्षेत्रीय दलों के नेताओं से लगातार मुलाकात कर रही हैं.

