डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ते साइबर फ्रॉड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने और ठगी के मामलों की जानकारी सामने आने के बावजूद लोग इसका शिकार बन रहे हैं। कोर्ट ने संदिग्ध बैंक लेन-देन पर समय रहते रोक लगाने और साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए प्रभावी नियम बनाने की जरूरत पर जोर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले भी CJI सूर्यकांत कह चुके हैं कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभा रही है और वह इस मुद्दे पर संसद के कानून का इंतजार नहीं कर सकती।
मोबाइल पर कोई गिरफ्तार कैसे हो सकता है?’
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सवाल किया कि लोग मोबाइल फोन के जरिए गिरफ्तारी होने की बात पर भरोसा कैसे कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद लोग डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी के जाल में क्यों फंस रहे हैं। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। सुनवाई में बताया गया कि हाल ही में एक महिला डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार होकर 2.5 करोड़ रुपये गंवा चुकी है।
संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोकने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी खाते में अचानक ऐसा ट्रांजैक्शन होता है, जो खाताधारक के सामान्य लेन-देन से मेल नहीं खाता, तो बैंक उसे तुरंत रोककर जांच क्यों नहीं कर सकते? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साइबर ठगी के बाद सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। ऐसी घटनाओं को समय रहते रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है, ताकि लोगों की मेहनत की कमाई को ठगों के हाथों में जाने से बचाया जा सके।
पैसे भेजने से पहले जांच हो, पुलिस को भी मिले सूचना
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि संदिग्ध बैंक लेन-देन सामने आने पर इसकी सूचना संबंधित पुलिस स्टेशन को दी जानी चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि रकम ट्रांसफर करने से पहले लेन-देन की प्रामाणिकता की जांच की जाए। अदालत के मुताबिक, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते जांच और उचित कार्रवाई से साइबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है और लोगों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।
बैंक की लापरवाही पर देना पड़ सकता है मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि जिन मामलों में बैंक की लापरवाही के चलते साइबर ठगी होती है, उनमें पीड़ितों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी बैंकों पर डाली जा सकती है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि बैंक संदिग्ध लेन-देन को लेकर जरूरी सतर्कता नहीं बरतते और इसकी वजह से किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान होता है, तो उन्हें पीड़ित की रकम लौटाने के लिए जिम्मेदार ठहराने पर विचार किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित बैंक को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने कहा, ‘RBI के दायरे में आता है मामला’
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि बैंकों की जवाबदेही तय करने और इससे जुड़े नियम बनाने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अंतर्गत आता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI को साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था पर विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रभावी नियम बनाए जाने की जरूरत है, ताकि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की लापरवाही से आर्थिक नुकसान झेलने वाले लोगों को उचित राहत मिल सके।
RBI से मुआवजे के नियम बनाने पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि प्रस्तावित नियमों में ऐसा प्रावधान शामिल किया जाए, जिसके तहत किसी वित्तीय संस्थान की लापरवाही से साइबर ठगी होने पर पीड़ित को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सके। अदालत ने RBI को अगली सुनवाई के दौरान सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची पेश करने का भी निर्देश दिया। सुनवाई में बताया गया कि RBI केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) नियमों में बदलाव के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है। ये निर्देश 30 नवंबर तक जारी किए जा सकते हैं, जबकि दिसंबर में इन्हें लागू किए जाने की संभावना है।
इस साल साइबर ठगी से करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बताया कि इस साल साइबर ठगी के ऐसे मामलों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। ऐसे में लोगों को यह समझना जरूरी है कि महज फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अगर कोई अनजान व्यक्ति इस तरह का दबाव बनाकर पैसे मांगता है, तो घबराकर रकम ट्रांसफर करने के बजाय तुरंत संबंधित पुलिस या आधिकारिक एजेंसी से संपर्क करना चाहिए।

