जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन कंपनियां रद्द की गई फ्लाइट टिकटों पर GST रिफंड का दावा कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि यात्रियों को टिकट का किराया और GST दोनों वापस किए गए हों। साथ ही, एयरलाइन के पास रिफंड से जुड़े पर्याप्त दस्तावेजी सबूत भी होने चाहिए। सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड बनाम कोच्चि सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण की कोच्चि स्थित एर्नाकुलम बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने माना कि उपलब्ध सबूतों से यह पुष्टि होती है कि रद्द टिकटों का रिफंड संबंधित यात्रियों को दिया गया और टैक्स का बोझ किसी अन्य पक्ष पर नहीं डाला गया।
रेवेन्यू डिपार्टमेंट को ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश
जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर एयरलाइन कंपनी के रिफंड क्लेम का निपटारा करे और ब्याज समेत राशि का भुगतान करे। यह मामला अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच सिंगापुर एयरलाइंस की ओर से दायर किए गए 8 GST रिफंड क्लेम से संबंधित है, जिनकी कुल राशि 45,92,528 रुपये है। दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान फ्लाइट्स रद्द होने के कारण एयरलाइन ने यात्रियों को टिकट के किराए के साथ GST की रकम भी वापस कर दी थी।
जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर ने पहले खारिज कर दिया था रिफंड क्लेम
जीएसटी के जॉइंट कमिश्नर ने पहले सिंगापुर एयरलाइंस के रिफंड क्लेम को खारिज कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर की। 16 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में न्यायाधिकरण ने जॉइंट कमिश्नर (अपील) के फैसले को रद्द कर दिया। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कोविड-19 महामारी के चलते फ्लाइट्स रद्द होने पर यात्रियों से वसूले गए और जीएसटी विभाग में जमा किए गए टैक्स का रिफंड एयरलाइन को मिलना चाहिए, क्योंकि कंपनी यात्रियों को जीएसटी सहित पूरा किराया वापस कर चुकी है।
इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक विकास
नंगिया ग्लोबल में इनडायरेक्ट टैक्स के पार्टनर राहुल शेखर ने इस फैसले को उद्योग जगत के लिए सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई ट्रांजैक्शन रद्द हो जाता है और ग्राहकों से वसूला गया पूरा टैक्स भी उन्हें वापस कर दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि रद्द हुए लेनदेन पर ग्राहकों को लौटाए गए टैक्स का उचित रिफंड मिलना चाहिए।

