आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए PM नरेंद्र मोदी ने आम लोगों से बातचीत की। Corona महामारी के चलते इस बार सभी लोग घर पर ही योग कर रहे है। वहीं योग दिवस पर PM मोदी ने कहा कि प्राणायाम करना बहुत जरूरी होता है। PM मोदी ने कहा- ‘Covid19 वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र यानी पर अटैक करता है। हमारे Respiratory system को मजबूत करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है, वो है प्राणायाम। इसलिए Corona काल में आप घर पर प्राणायाम जरूर करिए।’ आइए जानते हैं क्या है प्राणायाम और इसके फायदे …
प्राणायाम योग के 8 अंगों में से एक है
योगियों ने श्वास पर गहन गंभीर प्रयोग किए और यह निष्कर्ष निकाला कि प्राण को साध लेने पर सब कुछ साधा जा सकता है। श्वासों का संतुलित होना मनुष्य के प्राणों के संतुलन पर निर्भर करता है। प्राणों के सम्यक् व संतुलित प्रवाह को ही प्राणायाम कहते हैं। प्राणायाम योग के आठ अंगों में से एक है। अष्टांग योग में आठ प्रक्रियाएं होती हैं। Yoga के 8 अंगों में से चौथा अंग है प्राणायाम। प्राणायाम करते या श्वास लेते समय हम 3 क्रियाएं करते हैं- पूरक, कुम्भक और रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं अर्थात श्वास को लेना, रोकना और छोड़ना। अंतर रोकने को आंतरिक कुम्भक और बाहर रोकने को बाह्म कुम्भक कहते हैं। प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है – ‘प्राण (श्वसन) को लम्बा करना’ या ‘प्राण (जीवनीशक्ति) को लम्बा करना’। प्राण या श्वास का आयाम या विस्तार ही प्राणायाम कहलाता है। यह प्राण-शक्ति का प्रवाह कर व्यक्ति को जीवन शक्ति प्रदान करता है। योगासनों के बाद हर व्यक्ति को प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। हम ऐसे 3 प्राणायाम के बारे में बता रहे हैं, जिनका रोजाना अभ्यास करना चाहिए।
अनुलोम विलोम
सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं। आंखें बंद कर लें और सिर व रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। बाएं हाथ की हथेली को ज्ञान मुद्रा में बाएं घुटने पर रख लें। दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नॉस्ट्रिल पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नॉस्ट्रिल पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। अब बाएं नॉस्ट्रिल से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। फौरन ही दाएं नॉस्ट्रिल से अंगूठे को हटाकर सांस बाहर निकाल दें। अब दाएं नॉस्ट्रिल से सांस भरें और अंगूठे से उसे बंद कर दें। इस सांस को बाएं नॉस्ट्रिल से बाहर निकाल दें। यह एक राउंड हुआ। ऐसे 5 राउंड करें।
फायदे
तनाव और एंजायटी को कम करता है और प्राण शक्ति को बढ़ाता है।
कफ से संबंधित गड़बड़ियों को दूर करता है।
चित्त को शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है।
दिल को स्वस्थ रखता है, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है, फेफड़ों को ठीक रखता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।
उज्जयी प्राणायाम
किसी भी आरामदायक आसान में बैठ जाएं। सुखासन में बैठना ठीक है। आंखें बंद कर लें और दोनों नॉस्ट्रिल्स से हल्के हल्के लंबी सांस भरें और निकालें। ध्यान यह रखना है कि सांस को भरते और निकालते वक्त गले की मांसपेशियां सिकुड़ी हुई अवस्था में हों जिससे एयर पैसेज छोटा हो जाए। ऐसी स्थिति में सांस लंबी और गहरी होगी। गले द्वारा पैदा किए जा रहे अवरोध की वजह से सांस लेने और बाहर निकलने की आवाज होगी।
फायदे
इस प्रक्रिया में पैदा होने वाली ध्वनि मन को शांत करती है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद मिलती है और हार्ट रेट कम होता है।
नींद न आने और माइग्रेन में भी यह फायदेमंद है।
अस्थमा और टीबी को ठीक करने में मददगार है।
भ्रामरी प्राणायाम
सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। दोनों हाथों को चेहरे पर लाएं। दोनों अंगूठे दोनों कानों में जाएंगे, तर्जनी उंगली आंखों के ऊपर रखें, मध्यमा उंगली नाक के पास, अनामिका होंठ के ऊपर और सबसे छोटी उंगली होंठ के नीचे रहेगी। इसे शनमुखी मुद्रा कहते हैं। नाक से गहरा और लंबा सांस लें। अब भरे गए सांस को भंवरे के गूंजने की आवाज करते हुए बाहर निकालें। यह 1 राउंड हुआ। इस तरीके से 5 राउंड कर लें। बाद में बढ़ा भी सकते हैं।
फायदे
मन शांत होता है और दिमाग को आराम मिलता है।
नींद न आने की समस्या से छुटकारा।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

