मोदी-नीतीश ने पका दी ‘दूध और मखाना’ की सियासी खीर, बिहार चुनाव से पहले लालू-तेजस्वी के लिए मुश्किल !

Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का काउंटडाउन लगभग शुरू है। जल्द ही तारीखों के ऐलान की संभावना है। उससे पहले पीएम मोदी और सीएम नीतीश की जोड़ी ने ‘दूध और मखाना’ की सियासी खीर पका भी ली है। समझिए यहां…

बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन, जिसमें भाजपा और जेडीयू शामिल हैं, एकजुट होकर चुनावी अभियान की शुरुआत कर चुके हैं, वहीं एनडीए नेता विकास और परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने का दावा कर रहे हैं, जबकि विपक्ष जातिगत समीकरणों को भुनाने की कोशिश में लगा है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियां भी जल्द शुरू होने की संभावना है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को NDA ने बनाया हथियार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए ने अपनी सियासी बिसात बिछा दी है। भाजपा और जेडीयू मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2024 से अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग 60 प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा चुकी हैं। इन प्रेस वार्ताओं के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को बताया जा रहा है।

हम सब एक हैं- NDA

जिला स्तर पर समन्वय बैठकों के माध्यम से एनडीए के घटक दल आपसी तालमेल को और मजबूत कर रहे हैं। राज्य के एक भाजपा नेता ने कहा, ‘महागठबंधन (भारत गठबंधन) के हिसाब से एनडीए कहीं ज्यादा एकजुट है। हमारे बीच कोई आपसी झगड़ा नहीं है।’ भाजपा और जेडीयू नेता बूथ से लेकर जिला स्तर तक समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं। विधानसभा स्तर पर तालमेल सीट-बंटवारे के बाद तय किया जाएगा।

बीजेपी के समीकरण में यादव का ‘दूध’

बीजेपी प्रवक्ता प्रवक्ता सुमित शशांक ने मीडिया को बताया, ‘हम हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि हमने ज़मीन पर काम किया है।’ एनडीए खेमे का दावा है कि उनके पास यादव समाज से 16 प्रमुख चेहरे हैं। इनमें कुछ पूर्व सांसद और वर्तमान मंत्री भी हैं, जिनमें रामकृपाल यादव, बिजेंद्र यादव जैसे दिग्गजों का नाम शामिल है। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना को प्रमुखता से प्रचारित किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में बदलाव लाने के दावे किए जा रहे हैं।

मखाने और दूध की खीर का कॉम्बिनेशन समझिए

एक तरफ बीजेपी और JDU ने साफ-साफ कहा कि उनके पास 16 यादव चेहरे हैं जो एक परिवार से नहीं आते, उनकी पृष्ठभूमि भी अलग-अलग है। NDA का आरोप है कि राजद में लालू प्रसाद यादव परिवार ने खुद के अलावा किसी और यादव को पार्टी में बड़े मौकों के लिए उभरने नहीं दिया। उनका सीधा हिसाब सिर्फ परिवार को आगे बढ़ाना है। वहीं मखाना बोर्ड की स्थापना को NDA ने एक बड़ा कदम बताया गया है। मखाना उत्पादन में अग्रणी उत्तर बिहार की दलित और पिछड़ी वर्ग की महिलाएं इस पहल से सीधे लाभान्वित हो रही हैं। कुल मिलाकर मोदी-नीतीश की जोड़ी ने बाकी मुद्दों के अलावा ‘यादव के दूध और मखाने की खीर’ का नया सियासी कॉम्बिनेशन तैयार कर दिया।

जाति जनगणना को भी NDA ने बनाया अपना दांव

एनडीए की चुनावी रणनीति में जातिगत गणना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। राजद और कांग्रेस जातिगत समीकरणों के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। एनडीए नेता देश में जनगणना के नोटिफिकेशन के बाद अब खुल कर कह रहे हैं बिहार में नीतीश कुमार ने सबसे पहले सफलता के साथ ये काम करवा दिया। बीजेपी ने भी अपना संशय हटा दिया है और 2027 की जनगणना को अपनी उपलब्धि के रूप में सामने ले आई है।

नीतीश करेंगे बैटिंग और मोदी करेंगे फील्डिंग

एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। प्रचार की कमान जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में दी जाएगी। क्रिकेट के हिसाब से यूं समझिए कि बैटिंग की कमान सीएम नीतीश कुमार के हाथ में है, जबकि बिहार विधानसभा चुनाव में फील्डिंग की कमान खुद पीएम मोदी ने संभाल ली है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की विदेश यात्रा से लौटने के बाद बिहार पर केंद्रित अभियान शुरू हो जाएगा।

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