रांची के युवा नशे के गिरफ्त में है। कई युवा नशे का सेवन करने से मनोरोग के शिकार हो रहे हैं। नशा युवाओं की जिंदगी निगल रही है। नशे के सामानों की बात करें तो शराब, सिगरेट गांजा , कोकीन, अफीम, डेंडराइट और अन्य नशीली दवाएं शामिल हैं। खासकर युवा गांजे का इस्तेमाल ज्यादा करते दिखते है। इसके दुष्प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहे हैं। गांजा सीधे युवाओं के दिमाग पर असर डाल रहा है। इससे युवा मानसिक रोग के शिकार होकर चिकित्सालय पहुंच रहे हैं। नशा इस तरह से हभी हो गया है की कुछ समझ नही में नही आता, खासकर युवाओ में नशा एक क्रेज की तरह हो गया है। यह नशा एक सिगरेट के धुंए से शुरू होता है और चैन स्मोकिंग पर जाकर खत्म होता है। कई युवा ऐसे है जिनकी सुबह की शुरुआत नशे से ही होती है। और यह माहौल देर शाम तक बना रहता है। लड़के क्या लड़कियों पर भी इसका खासा असर देखने को मिल रहा है। रांची के मोरबादी मैदान के समीप ऐसी कई लड़कियां आपको दिख जाएंगी जो नशे का सेवन करती है। मोरबादी उनका पसंदीदा जगह है। खासकर 8:00 बजे रात्रि के बाद कुछ लड़के और लड़कियां मोरबादी मैदान के समीप एकत्रित होते हैं। और नसे का सेवन करते हैं। वैसे झारखंड सरकार ने सरकारी शराब दुकान की संख्या बढ़ा दी है। लाजमी है कि एसे में युवा शराब के नशे में पड़ेंगे ही। भारत देश युवाओं का देश माना जाता है। ऐसे में अगर हमारे युवा नसे के धुंध में रहेंगे तो देश के भविष्य का क्या होगा।
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