राजनीति में कही गई हर बात समय के साथ पीछा करती है. समय और जरूरत के अनुसार नेता इसका इस्तेमाल भी बखूबी करते हैं. आज यही बात फिर सामने आई, जब शराबबंदी को लेकर बिहार में शपथ दिलाई गई. बिहार में शराबबंदी को सफल बनाने और कानून का मजबूती से पालन कराने को लेकर बिहार सरकार ने शपथ समारोह का आयोजन किया था. सरकार में शामिल तमाम मंत्री, नेता, पुलिस पदाधिकारी और राज्य कर्मचारियों ने एकसाथ शराब नहीं पीने की शपथ ली. इस शपथ कार्यक्रम से विपक्ष अपने को पूरी तरह अलग रखा.
शपथ समारोह में आरजेडी के शामिल नहीं होने को लेकर जब आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने नीतीश कुमार की पुराने बातों को याद करते हुए तंज कसा और कहा कि नीतीश कुमार ने इससे पहले भी एक शपथ ली थी, मिट्टी में मिल जाएंगे पर बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, नीतीश कुमार ने अपने उस शपथ का क्या हश्र किया.
आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने गीता की बात करते हुए कहा कि गीता में कहा गया है कि जब राजा ही बात को ना माने, तो फिर प्रजा कैसे मानेगी. नीतीश कुमार को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वे शपथ दिलाने के काबिल बचे हैं या नहीं.
कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने शपथ समारोह पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि शपथ एक बार ही ली जाती है, बार-बार नहीं ली जाती. नीतीश कुमार शपथ के नाम पर बिहार में इवेंट मैनेजमेंट कर रहे हैं. आज बिहार में हर जगह शराब मिल रही और लोग जहरीली शराब से मर रहे हैं.
जेडीयू नेता नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि आरजेडी के संविधान की धारा 5(ख)2 में लिखा है कि पार्टी के क्रियाशील सदस्य बनने के लिए खुद को मादक पदार्थो से दूर रखना जरूरी है. अगर आरजेडी अपने संविधान में यह बात कहती है तो आरजेडी के सभी लोगों को शपथ लेना जरूरी है. लेकिन आरजेडी के कई नेता इस मामले में पकड़ाए हैं. जगदानंद सिंह इसके राजनीतिक अर्थ न खोजें, बल्कि सामाजिक सरोकार के विषय पर सरकार के साथ खड़े हों.


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