संसद के मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है। राज्यसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गहमागहमी बनी हुई है। राज्यसभा की कार्रवाही शुरू होते ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया है। भाजपा से जेपी नड्डा ने खरगे के शुद्धिकरण के आरोपों का जवाब दिया है।
आज मानसून सत्र का आखिरी दिन है और आज भी संसद में गतिरोध टूटने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इससे पहले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर विपक्ष के बात करने और चर्चा करवाने की अपील की। शाह ने कहा है कि वो चर्चा बाद हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े हैं। उनका कहना है अमित शाह के भाषण में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।
आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होती स्पीकर ओम बिरला ने अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। वहीं, राज्यसभा की कार्रवाई जारी है। ऐसे में देखना है कि मानसून सत्र ऐसे ही विपक्ष के शोर शराबे और हंगामे की वजह से धुल जाता है या फिर आखिरी दिन कोई चर्चा हो पाएगी। गृहमंत्री ने साफ कह दिया है कि विपक्ष छात्रों पर कार्रवाई समेत जिस मुद्दे पर चर्चा चाहता है, वो उस पर चर्चा करने के हम तैयार हैं।
राज्यसभा में खरगे ने उठाया शुद्धिकरण का मुद्दा
राज्यसभा में कार्यवाही जारी है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुद्धकरण का मुद्दा उठाया। खरगे ने कहा कि उत्तराखंड में मेरे भाषण के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया। वहीं, इस पर जेपी नड्डा ने कहा, हलद्वानी में जो हुआ वो दुखद है। शुद्धिकरण मामले की सरकार जांच कराएगी।
खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग थे। इस पर जेपी नड्डा ने कहा है बीजेपी के लोग नहीं थे लेकिन हम जांच करेंगे। जिन लोगों ने शुद्धिकरण किया वो किस पार्टी या संगठन से संबंध थे, जिन्होंने किया था उनसे बात भी करिए।
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही वंदे मातरम गीत गाया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्ष अब अमित शाह के इस्तीफे पर अड़ा
पहले छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग को लेकर प्रोटेस्ट हुआ। फिर गृहमंत्री अमित शाह का बयान देने की मांग पर विपक्ष अड़ा रहा। अब जब अमित शाह संसद में बयान देने के लिए तैयार हैं तो विपक्ष उनकी इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि टर्म एंड कंडीशन के साथ संसद में चर्चा नहीं हो सकती है यानि कुल मिलाकर कहें तो आज भी संसद में हंगामा देखने को मिलेगा।
क्या आज संसद चलेगी?
संसद के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या आज संसद चलेगी क्योंकि 20 जुलाई से लेकर अब तक संसद में सिर्फ 19 घंटे काम हुए। समझिए कम से 108 घंटे का काम काज होना चाहिए था लेकिन सिर्फ 19 घंटे। अगर एवरेज निकालेंगे तो रोजाना लोकसभा सिर्फ 60 मिनट ही चली है। इस दौरान 11 बिल पास किए गए। दो बिल तो चर्चा के बाद पास हुई लेकिन 9 बिल ऐसे थे, जिस पर ना तो चर्चा हुई ना कोई बहस हुई। बस हंगामे के बीच पेश किया गया और ध्वनीमत से पास कर दिया गया।
कौन-कौनसे बिल नहीं हो पाए पास?
सरकार ने ये बिल तो पास करवा लिए लेकिन विपक्ष की जिद का असर दूसरे बिलों पर पड़ा।
ये बिल नहीं हो पाए पास-
विदेशों से मिलने वाले चंदे और फंडिंग के नियमों को और कड़ा करने वाला FCRA बिल इस सत्र में पास नहीं हो पाया
शिक्षा सुधार विधेयक दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है।
सीटों के नए सिरे से निर्धारण को लेकर परिसीमन बिल पर सरकार विपक्ष को राजी नहीं कर पाई।
मानसून सत्र में कितने बिल पास?
विपक्ष के हंगामे के बावजूद सरकार कुछ हद तक बिल पास करवाने में कामयाब रही। इस मॉनसून सत्र में-
परीक्षाओ में धांधली रोकने वाला एंटी पेपर लीक बिल
केरल का नाम बदलकर केरलम करने वाला बिल
डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र और नागरिक पंजीकरण बिल
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़ा बिल
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के भुगतान के लिए MSME विधेयक
इनकम टैक्स और टैक्स सुधार से जुड़ा बिल
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक
और खनन क्षेत्र में सुधारों और राज्यों की मांगों से जुड़ा विधेयक पास करवाने में कामयाबी हासिल की।
लोकसभा में 18 दिन में कितने घंटे काम हुआ?
लोकसभा में अबतक 18 दिन में सिर्फ 19 घंटे 23 मिनट काम हुआ है। जबकि शेड्यूल के हिसाब से 108 घंटे काम होना चाहिए था। यानि लोकसभा में सिर्फ 18% काम हुआ। 18 दिनों में लोकसभा में 12 बिल पास हुए और राज्यसभा में दो बिल पास हुए। हंगामे की वजह से लोकसभा का करीब 133 करोड़ रुपये बर्बाद हुआ।
अमित शाह के जवाब में कोई दिलचस्पी नहीं-राहुल
संसद में रोज प्रदर्शन कर रही विपक्ष की कुछ पार्टियां भी चर्चा चाहती हैं लेकिन राहुल गांधी अड़े हुए हैं। उनका सीधा निशाना अमित शाह हैं। वो अमित शाह से जवाब चाहते हैं लेकिन सदन की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहते। हालांकि अमित शाह ने स्पीकर को चिट्ठी लिखने के पहले खुद सामने आकर खुद कोशिश की। अमित शाह की ये अपील भी राहुल गांधी की जिद नहीं तोड़ पाई। उन्होंने साफ इशारा दे दिया कि वो शाह को निशाना बनाएंगे और सदन चलाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। उनका कहना है अमित शाह के भाषण में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।
चर्चा करवाने के लिए अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चर्चा करवाने के लिए लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में शाह ने लिखा है, ”मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि आप इस विषय पर विपक्षी दलों के साथ परामर्श करें। सभी दलों की सहमति से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस के लिए जितना भी समय आवश्यक हो वह आवंटित किया जाए। मैं खुद पूरी चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित रहूंगा और बहस के अंत में विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों और आशंकाओं का विस्तार से जवाब दूंगा।”

