करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस पर्व पर पूजा-पाठ के साथ सोलह श्रृंगार की परंपरा भी विशेष रूप से देखने को मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिंदूर, बिंदी और चूड़ियों को इतना खास क्यों माना जाता है?
दरअसल, हिंदू परंपरा में सोलह श्रृंगार को सौंदर्य, सुहाग और शुभता का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर को वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है, जबकि बिंदी को पारंपरिक शृंगार का अहम हिस्सा माना जाता है। वहीं, चूड़ियां भारतीय संस्कृति में सुहाग और खुशहाली का प्रतीक मानी जाती हैं।
सोलह श्रृंगार में सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, काजल, मंगलसूत्र, बिछिया, पायल, मांगटीका और अन्य आभूषण शामिल किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार इनकी सूची में बदलाव हो सकता है।
करवा चौथ के दिन महिलाएं अपनी पसंद और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सजती-संवरती हैं और शाम को करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है।
सोलह श्रृंगार केवल सजने-संवरने तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी एक खास पहचान भी है।
सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें आती हैं?
सामान जुटाते समय अक्सर यहीं उलझन होती है. किसी सूची में महावर मिलता है तो किसी में इत्र और गजरा. दरअसल, सोलह श्रृंगार की कोई एक सूची सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रचलित नहीं है. स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसमें कुछ चीजें बदल जाती हैं. इस लिस्ट में ये चीजें शामिल हैं-
1- बिंदी: माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी या कुमकुम
2- सिंदूर: मांग में लगाया जाने वाला सिंदूर
3- मांग: टीका मांग और माथे का आभूषण
4- काजल: आंखों का श्रृंगार
5- नथ: नाक का आभूषण
6- कर्णफूल: कानों के झुमके या बालियां
7- हार या मंगलसूत्र: परंपरा के अनुसार गले का आभूषण
8- मेहंदी: हाथों और पैरों पर रचाई जाने वाली मेहंदी
9- चूड़ियां: कलाइयों का श्रृंगार
10- बाजूबंद: बांह पर पहना जाने वाला आभूषण
11- अंगूठी: हाथ की उंगलियों का आभूषण
12- कमरबंद: कमर पर पहना जाने वाला आभूषण
13- पायल: पैरों का आभूषण
14- बिछिया: पैर की उंगलियों में पहना जाने वाला आभूषण
15- गजरा: फूलों से बालों की सजावट
16- इत्र: सुगंध के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रसाधन
यह एक प्रचलित सूची है. परिवार और क्षेत्र के अनुसार इसमें अंतर मिल सकता है.
श्रृंगार का शुक्र ग्रह से क्या संबंध है?
ज्योतिष में शुक्र को सौंदर्य, आकर्षण, वस्त्र, आभूषण, सुगंध और दांपत्य सुख का कारक माना जाता है. इसी वजह से सजने-संवरने की परंपरा को शुक्र से जोड़कर समझाया जाता है.
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि गहने पहनते ही कुंडली का शुक्र मजबूत हो जाएगा. ग्रह का फल उसकी राशि, भाव, दृष्टि, बल और दशा जैसी स्थितियों से देखा जाता है. इसलिए करवा चौथ के श्रृंगार को वैवाहिक परेशानियां दूर करने का निश्चित उपाय बताना सही नहीं होगा.
इसी तरह हर आभूषण को अलग ग्रह से जोड़कर यह कहना कि उसे पहनने से कोई दोष समाप्त हो जाएगा, स्पष्ट शास्त्रीय संदर्भ के बिना स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

