कानपुर कांड: चौबपुर के पूर्व SO विनय तिवारी और बीट प्रभारी के के शर्मा गिरफ्तार

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कानपुर ब्रेकिंग – चौबपुर के पूर्व एसओ विनय तिवारी और बीट प्रभारी के के शर्मा हुए गिरफ्तार,मुठभेड़ के समय पुलिस टीम की जान खतरे में डालने और मौके से फरार होने और विकास दुबे से संबंध में हुए गिरफ्तार, आईजी मोहित अग्रवाल और एसएसपी दिनेश कुमार पी ने की गिरफ्तारी की पुष्टि।

बुधवार को विनय तिवारी के अलावा तत्कालीन बीट प्रभारी केके शर्मा से भी पूछताछ की गई है। पूछताछ के बाद उनको भी गिरफ्तार कर लिया गया है। केके शर्मा पर भी मुखबिरी का आरोप है। बता दें कि पुलिस की टीम विकास दुबे के सभी मददगारों के कॉल डिटेल खंगाल रही है। इस मामले में पूरे चौबेपुर थाने को लाइन हाजिर किया जा चुका है।

विनय तिवारी पर क्यों हुआ शक?

गौरतलब है कि शहीद CO देवेंद्र मिश्रा का कथित लेटर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने चौबेपुर के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी और बदमाश विकास दुबे के बीच मिलीभगत की शिकायत तत्कालीन SSP अनंत देव से की थी। शहीद CO के वायरल लेटर के सामने आने के बाद मुखबिरी के शक की सबसे पहले सुई SO विनय तिवारी पर गई थी।

जब पुलिस टीम बिकारू जा रही थी, तभी SO विनय तिवारी ने फोन करके लाईट कटवाया था। तमाम आरोप के बाद विनय तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद चौबेपुर थाने के 2 दारोगा और एक सिपाही को भी सस्पेंड किया गया था. सभी से पूछताछ की जा रही है।

शहीद सीओ ने अपने खत में क्या लिखा

शहीद CO देवेंद्र मिश्रा ने अपने कथित खत में लिखा था कि विकास दुबे पर करीब 150 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। 13 मार्च को इसी विकास दुबे के खिलाफ चौबेपुर थाना में एक मुकदमा दर्ज हुआ था, जो IPS की धारा 386 के तहत दर्ज हुआ था। मामला एक्सटार्शन का था। इसमें दस साल तक की सजा का प्रावधान है और ये एक गैर जमानती अपराध है।

शहीद CO देवेंद्र मिश्र ने लिखा कि गैर जमानती अपराध होने के बावजूद जब चौबीस घंटे तक विकास दुबे के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और उसे गिरफ्तार नहीं किया गया तो 14 मार्च को उन्होंने केस का अपडेट पूछा। इस पर उन्हें पता चला कि चौबेपुर के SO विनय कुमार तिवारी ने FIR से 386 की धारा हटा कर पुरानी रंजिश की मामूली धारा लगा दी।

इस पत्र में शहीद CO देवेंद्र मिश्र ने साफ-साफ लिखा था कि थानाध्यक्ष विनय तिवारी का विकास दुबे के पास आना-जाना और बातचीत बनी हुई है। इतना ही नहीं CO साहब ने चार महीने पहले ही आगाह कर दिया था कि अगर थानाध्यक्ष अपने काम करने के तरीके नहीं बदलते तो गंभीर घटना घट सकती है।

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