JMM ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के कार्यक्रमों तथा उनके बयानों पर पैनी नजर रखने की गुजारिश ELECTION COMMISSION से की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बाबत भेजे गए पत्र में कहा है कि केंद्रीय मंत्री ने वन अधिकार अधिनियम 1927 में संशोधन से संबंधित ड्राफ्ट वापस लेने की घोषणा दिल्ली में की थी। JMM का दावा है कि यह घोषणा झारखंड राज्य विधानसभा चुनाव को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित एवं प्रबुद्ध मतदाताओं के बीच प्रलोभन एवं दिग्भ्रमित करने की मंशा से किया गया है।
रविवार को मीडिया से मुखातिब JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इसी वर्ष वन कानून में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजा गया था। इस संशोधन द्वारा वन क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के वनाधिकार पर कुठाराघात करने की तैयारी थी। इससे देश के वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों एवं मूलवासियों के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। लिहाजा संबंधित राज्यों के आदिवासियों और मूलवासियों ने इसका प्रखर विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि जनाक्रोश को देखते हुए वन मंत्रालय ने इसे वापस लेने की घोषणा ऐसे समय में की, जब झारखंड में चुनाव होने वाले हैं और यहां आचार संहिता लागु है। झारखंड विधानसभा चुनाव के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं पांचवें चरण के चुनावों में वन क्षेत्र में रहने वाले प्रबुद्ध मतदाताओं की एक बड़ी आबादी निवास करती है। उन्होंने आशंका जताई है कि प्रबुद्ध मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए इस तरह की घोषणा की जा रही है।
