संसद के उच्च सदन राज्यसभा की 37 सीटें रिक्त हैं। इन 37 सीटों के लिए मतदान होना था। हालांकि इनमें से 26 सीटों पर पहले ही निर्विरोध उम्मीदवारों का चयन किया जा चुका है। वहीं अब 11 रिक्त सीटों के लिए आज सोमवार को मतदान हो रहा है। जिस राज्य में सीटें रिक्त होती हैं, उस राज्य की विधानसभा में वहां के विधायक ही इन उम्मीदवारों के लिए वोट डालते हैं। जिन 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है, उनमें पांच सीटें बिहार, चार ओडिशा और दो सीटें हरियाणा की रिक्त हैं। इन 11 सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है और शाम तक नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।
चुनाव जीतने के लिए कितने वोट जरूरी
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार चुनने के लिए मिलने वाले वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करता है। इसे समझने के लिए बिहार का उदाहरण लेते हैं। बिहार में कुल विधायकों की संख्या 243 है। यहां किसी नेता को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए, आइये इसे समझते हैं। यह तय करने के लिए कुल विधायकों की संख्या को जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है। इसके बाद जो संख्या आती है, उसमें एक और जोड़ देते हैं। प्राप्त अंक ही वह संख्या होती है, जितने वोटों की जरूरत जीत के लिए होती है।
इस संख्या को भी बिहार के आंकड़े से रही समझते हैं। इस बार बिहार से 5 राज्यसभा सदस्यों का चयन होना है। इसमें 1 जोड़ने से यह संख्या 6 होती है। अब कुल सदस्य 243 हैं तो 243 को 6 से विभाजित करने पर प्राप्त अंक 40.50 आता है। इसमें फिर 1 जोड़ने पर यह संख्या 41.50 हो जाती है। यानी बिहार से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 41 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी। इसके अलावा वोट देने वाले हर विधायक को यह भी बताना होता है कि उसकी पहली पसंद और दूसरी पसंद का उम्मीदवार कौन है। इससे वोट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाते हैं। यदि उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता का वोट मिल जाता है तो वो वह जीत जाता है नहीं तो इसके लिए चुनाव होता है।
निर्विरोध चुने गए 26 उम्मीदवार
राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों में 26 नेता निर्विरोध चुने गए हैं।
रामदास अठावले
विनोद तावड़े
शरद पवार
रामराव वडकुटे
माया इवनेते
ज्योति वाघमारे
पार्थ पवार
अभिषेक मनु सिंघवी
बाबुल सुप्रियो
राजीव कुमार
मेनका गुरुस्वामी
कोयल मल्लिक
राहुल सिन्हा
जोगेन मोहन
तेराश गोवाला
प्रमोद बोरो
वेम नरेंद्र रेड्डी
एम थंबीदुरई
अंबुमणि रामदास
तिरुचि शिव
जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन
एम क्रिस्टोफर तिलक
एल के सुदेश
लक्ष्मी वर्मा
फूलो देवी नेताम
अनुराग शर्मा
कभी भंग नहीं होती राज्यसभा
एक तरफ जहां लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और उसे भंग भी किया जा सकता है, जबकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है अर्थात यह कभी भी कार्य करना बंद नहीं करती। राज्यसभा के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, लेकिन सभी सदस्यों का कार्यकाल एक ही समय पर शुरू या समाप्त नहीं होता। इसके बजाय, प्रत्येक दो वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। उनका कार्यकाल समाप्त होने पर, उन सीटों को भरने के लिए चुनाव होते हैं। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि सदन में हमेशा अनुभवी सदस्य रहें और उसका कार्य सुचारू रूप से चलता रहे।





