सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या को अक्सर लोग थकान, कमजोरी या नींद पूरी न होने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण एक साथ हों या बार-बार सामने आएं, तो इन्हें हल्के में लेना सही नहीं है। इसके पीछे माइग्रेन, डिहाइड्रेशन या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जैसी वजहें हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है, जिसमें समय पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है। फोर्टिस, नोएडा की न्यूरोलॉजी निदेशक डॉ. ज्योति बाला शर्मा ने बताया है कि किन परिस्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
माइग्रेन हो सकता है एक कारण
माइग्रेन का असर सिर्फ तेज सिरदर्द तक ही सीमित नहीं रहता। कई लोगों को इसके दौरान चक्कर आना, शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत, जी मिचलाना और तेज रोशनी या आवाज से परेशानी भी हो सकती है। इन लक्षणों को वेस्टिबुलर माइग्रेन कहा जाता है।
ब्लड प्रेशर और शरीर में पानी की कमी
लो ब्लड प्रेशर के कारण अचानक खड़े होने पर चक्कर आ सकते हैं। वहीं, शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक भूखे रहने या ब्लड शुगर कम होने से सिरदर्द, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कान से जुड़ी समस्याएं और एनीमिया
कान के अंदर संतुलन को नियंत्रित करने वाली प्रणाली में गड़बड़ी होने से चक्कर आ सकते हैं। वहीं, एनीमिया यानी खून में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण थकान, कमजोरी और सिरदर्द हो सकता है। कुछ मामलों में व्यक्ति को चक्कर आने की परेशानी भी होती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर अचानक तेज सिरदर्द हो और इसके साथ बोलने में दिक्कत, शरीर में कमजोरी या सुन्नपन, नजर में बदलाव, बेहोशी या चलने में परेशानी हो, तो बिना देर किए इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। ये लक्षण स्ट्रोक या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं।
क्या सावधानियां बरतें?
सिरदर्द और चक्कर से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं, समय पर भोजन करें और पूरी नींद लें। यदि ये लक्षण बार-बार हों या बढ़ने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर ब्लड प्रेशर, शुगर और हीमोग्लोबिन की जांच कराई जा सकती है। सही कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है, ताकि समय रहते उचित उपचार मिल सके।

