केंद्र सरकार की विदेशों में जमा काले धन के खिलाफ लड़ाई जारी है इसी कड़ी में आयकर विभाग के अधिकारियों ने ऐसे 2000 भारतीय नागरिकों की पहचान की है जिनके पास दुबई में संपत्तियां तो मौजूद है लेकिन उन्होंने अपने आईटी रिटर्न में इस बात का कोई जानकारी नहीं दी है। आयकर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक भारत के कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने हाल ही में दुबई समेत अन्य देशों में संपत्तीयां खरीदी शेल कंपनियों को ट्रांसफर की गई। आयकर विभाग ने ये भी बताया कि ऐसा करने का मकसद सिर्फ गलत तरीके से कमाए पैसो को छुपाने, रखने और आयकर बचाने के लिए किया गया है, जिनपर अब नकेल कसी जाएगी। बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और विदेशों में काले धन को जमा करने के लिए दुबई को चुना गया है जिन 2000 लोगों की इनकम टैक्स ने पहचान की है उनमें कई नामी कारोबारी और कई सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। ब्लैक मनी एक्ट के तहत आयकर विभाग अब ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।
आपको बता दें आयकर कानून के सेक्शन FA तहत सालाना आईटी रिटर्न भरते समय देश के बाहर खरीदी गई संपत्तियों, संसाधनों और देश के बाहर की कंपनियों की जानकारी देना भी जरूरी होता है। ऐसा ना करने पर या ऐसी किसी भी संपत्ती के व्योरो को छुपाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई करने करने का प्रावधान है।

