एक्टर गौरव गेरा इन दिनों अपनी दमदार एक्टिंग को लेकर चर्चा में हैं। धुरंधर और उसके सीक्वल में ‘आलम भाई’ के किरदार से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया है। हालांकि, सफलता की इस ऊंचाई तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। हाल ही में गौरव ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए खुलासा किया कि एक दौर ऐसा भी था, जब उनकी जेब में 100 रुपये तक नहीं हुआ करते थे। आज उनकी मेहनत और लगन ही उन्हें इंडस्ट्री के चर्चित कलाकारों में शामिल कर रही है।
गौरव गेरा के परिवार का फिल्मों से नहीं था नाता
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में गौरव गेरा ने अपने संघर्ष और शुरुआती दिनों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं था और वह घर के पहले सदस्य थे जिन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। गौरव के अनुसार, स्कूल के समय से ही उनकी रुचि कला और परफॉर्मिंग एक्टिविटीज में थी। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन उन्हें हमेशा महसूस होता था कि उनकी असली पहचान और प्रतिभा कला के क्षेत्र में ही है।
फैशन डिजाइनिंग से शुरू किया करियर
गौरव गेरा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही स्केचिंग और आर्ट में खास रुचि थी। कॉलेज में उन्होंने आर्ट्स क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने फैशन की ओर रुख किया, हालांकि महंगे कोर्स को देखते हुए उन्होंने इसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया। गौरव के मुताबिक, उनके पिता ने उन्हें पहले कुछ समय काम करने की सलाह दी। करीब छह महीने नौकरी करने के बाद उन्होंने अपने दिल की सुनी और थिएटर जॉइन कर अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया।
गौरव गेरा के पास थे 84 रूपये
मुंबई में संघर्ष के दिनों को याद करते हुए गौरव गेरा ने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब उनके बैंक खाते में सिर्फ 84 रुपये बचे थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करते रहे। गौरव ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा उनका साथ दिया, लेकिन सीमित आय के कारण जितनी मदद संभव थी, उतनी ही कर पाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि वह हमेशा आत्मनिर्भर बनना चाहते थे और जीवन में लेने से ज्यादा देने की इच्छा रखते थे।
