हाल ही में देश के कई हिस्सों में आग का तांडव देखने को मिला है. दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के खौफ से लोग बाहर आए नहीं थे कि अगले ही दिन बिहार के मुजफ्फरपुर में आग ने पांच-छह मरीजों को लील लिया. इसके बाद आज (शुक्रवार, 5 जून) उत्तर प्रदेश के नोएडा और फिर मध्य प्रदेश के इंदौर में आग ने फ्लैट और शोरूम खाक कर दिए. तीन दिन में आग की चार भयानक घटनाओं ने लोगों को डरा दिया है और करीब 26 लोगों की जलकर या काले धुएं की चपेट में आकर मौत हो गई है.
दिल्ली का मालवीय नगर अग्निकांड
दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौजरानी में एक होटल बना था, जिसका नाम था फ्लरिश स्टे. इस होटल के नीचे लेमन ग्रीन नाम का एक रेस्टोरेंट चल रहा था. यह इलाका संकरी गलियों और सटी इमारतों से भरा हुआ तो है ही, फिर भी यहां रोजाना बहुत भीड़ रहती है. वजह है पास में बने बड़े प्राइवेट अस्पताल जहां लोग अपने और अपनों के इलाज के लिए देश विदेश से आते हैं. ये लोग अस्पताल के पास ही होटल आदि लेकर रहते हैं. फ्लरिश होटल भी उन्हीं में से एक था.
बुधवार (3 जून) को भी सब सामान्य रूप से ही चल रहा था, तभी अचानक सुबह 8.50 के करीब ग्राउंड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई. कुछ ही समय में यह आग इतनी तेजी से फैली कि इमारत में मौजूद लोग वहीं फंस गए. इस बिल्डिंग में कुल 47 लोग मौजूद थे. बेसमेंट, रेस्टोरेंट और ऊपर बने सभी कमरों में मौजूद 21 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. वहीं, कई गंभीर घायल अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. कई लोग जान बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर दूसरी तीसरी मंजिल से नीचे कूदे. कइयों के हाथ-पैर टूटे, कई जिंदा नहीं बच सके.
मारे गए लोगों में से ज्यादातर अफ्रीका या बांग्लादेश से आए विदेशी थे. ऐसे में इस घटना को विपक्ष ने इसे ‘इंटरनेशनल शेम’ बताया. यह खौफनाक हादसा उस इलाके और पूरी दिल्ली में मौजूद ऐसे होटलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है.
बिहार का मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक अस्पताल है, प्रसाद हॉस्पिटल. इसे मुजफ्फरपुर का सबसे बड़ा अस्पताल कहा जाता है. यहां भी लोग दूर-दूर से इलाज के लिए आते हैं. अस्पताल के आईसीयू वॉर्ड में 15 बेड लगे थे, जिनपर 15 मरीज थे. गुरुवार (4 जून) की सुबह करीब 3.00 बजे इस वॉर्ड में शॉर्ट सर्किट से अचानक आग लग गई और पूरा वॉर्ड काले धुएं से भर गया.
आईसीयू में भर्ती मरीजों की हालत पहले से ही गंभीर होती है. ऐसे में आग भड़कने पर वह वहां से भाग भी नहीं सकते थे. जब लोगों ने कमरे से काला धुआं आते देखा तो दमकल विभाग को फोन किया गया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. आईसीयू में भर्ती 5 से 6 मरीजों की जान जा चुकी थी. वहीं, बाकी मौजूद मरीजों के फेफड़ों में काला धुआं भर गया था. उन्हें गंभीर हालत में अन्य अस्पतालों में तुरंत इलाज के लिए भेजा गया.
बताया जा रहा था कि हादसे के समय वहां अस्पताल का स्टाफ मौजूद नहीं था. लोग मदद मांग रहे थे लेकिन कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिल रहा था. सिक्योरिटी गार्ड तक वहां नहीं दिख रहे थे. ऐसे में तीमारदार खुद ही धुएं भरे कमरे में घुसे, अपने मरीजों को ढूंढा और उन्हें निकालकर दूसरे अस्पताल ले गए. इसके बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने भी मरीजों का रेस्क्यू कर उन्हें एंबुलेंस के जरिए रवाना किया. हालांकि, इतनी बड़ी लापरवाही और 6 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है, यह अब तक पता नहीं लगा है.
नोएडा के फ्लैट में भड़की भयावह आग
मामला है शुक्रवार (5 जून) का, जब नोएडा के सेक्टर-75 स्थित आईवी काउंटी सोसाइटी की 12वीं मंजिल पर बने एक फ्लैट में जबरदस्त आग भड़क गई. यह बिल्डिंग 28 फ्लोर की है और आग 12वीं फ्लोर पर लगी थी. तेज हवा की वजह से आग इतनी तेज फैली कि फ्लैट की खिड़कियों से ऊंची-ऊंची लपटें देखी जा सकती थीं. ऊपर के कई फ्लैट भी इस आग की चपेट में आए. अचानक काले धुएं का गुबार बुरी तरह फैल गया.
आसपास के सभी फ्लैट्स के लोग अपनी जान बचाने के लिए सीढ़ियों से नीचे भागे. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन उनकी सीढ़ियां केवल 6 मंजिल तक ही जा सकती थीं. बिना हाइड्रोलिक मशीन के ही फायर ब्रिगेड आग बुझाने की कोशिश करती रही, लेकिन यह संभव नहीं था. गनीमत रही कि सोसाइटी का इंटरनल फायर फाइटिंग सिस्टम सही था, जिससे आग पर तत्काल काबू पाया जा सका और कोई जनहानि नहीं हुई.
इंदौर के कार शोरूम में आग की दहशत
नोएडा से आग की खबर आने के कुछ ही देर बाद मध्य प्रदेश के इंदौर से भी अग्निकांड की सूचना मिली. इंदौर के स्कीम नंबर 136 की एक बहुमंजिला इमारत के बेसमेंट में सुबह भीषण आग लग गई. बेसमेंट में ई-व्हीकल शोरूम था, जहां आग तेजी से फैली और कई नए वाहन जलकर खाक हो गए.
आग से उठे घने धुएं और लपटों के चलते पास की इमारतों में रहने वाले लोगों पर भी असर पड़ा. धुएं के कारण दम घुटने की स्थिति बन गई. फिर फायर ब्रिगेड ने दो इमारतों के बीच सीढ़ी लगाकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और वहां फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका. 14 हजार लीटर पानी और लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका.

