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धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान वायरल,‘ तुम दुर्गा बनो, काली बनो, तुम कभी ना बुर्के वाली बनो…

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है. इस महोत्सव में पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि 18 से 25 वर्ष की उम्र व्यक्ति के जीवन का निर्णायक समय होता है. इस आयु वर्ग में यदि कोई युवक या युवती अनुशासित रहता है तो वह आगे कभी नहीं बिगड़ता, लेकिन यदि इसी समय वह गलत राह पर चला जाए तो सुधार मुश्किल हो जाता है.

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि किसी को कोई और नहीं बिगाड़ता, बल्कि व्यक्ति खुद अपने आचरण और विचारों से सही या गलत दिशा चुनता है. राम के राज्य में रहकर मंथरा नहीं सुधरी और रावण के राज्य में रहकर विभीषण नहीं बिगड़े. लड़कियों को संबोधित करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि तुम दुर्गा बनो, काली बनो, तुम कभी ना बुर्के वाली बनो. बागेश्वर बाबा का ये वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब वायरल हो रहा है.

1 लाख आहुतियां महायज्ञ में डाली जा रहीं
डबरा में चल रहे इस तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं. प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. कथा का समापन तीसरे दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा. इस रोजाना 1 लाख आहुतियां महायज्ञ में डाली जा रही हैं.

10 फरवरी से हो रहा है कार्यक्रम
डबरा में 10 फरवरी से नवग्रह शक्तिपीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है. यहां स्थित मंदिर का निर्माण 108 खंभों पर हुआ है. इस मंदिर की वास्तु कला की खूब चर्चा हो रही है. मंदिर का निर्माण 108 विशाल खंभों पर किया गया है, जो इसकी संरचना को भव्य और मजबूत स्वरूप देते हैं. स्थापत्य कला की दृष्टि से यह मंदिर बेहद खास बताया जा रहा है. इसकी बनावट ऐसी है कि मंदिर की एक मीनार की परछाईं दूसरी मीनार पर नहीं पड़ती. मंदिर परिसर में स्थापित नवग्रहों की सभी प्रतिमाएं अष्टधातु से निर्मित हैं. हर मूर्ति का वजन लगभग 15 से 15 क्विंटल बताया जा रहा है.

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संबंध मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम से है. छतरपुर के गढ़ा गांव में स्थित बागेश्वर धाम में हर मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां लगने वाले दरबार में लोग अपनी समस्याओं के समाधान की कामना लेकर आते हैं और श्रद्धा स्वरूप नारियल चढ़ाते हैं. मेले के दौरान हजारों की संख्या में भक्त जुटते हैं, जिससे परिसर में नारियल का बड़ा ढेर लग जाता है.

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