Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि हमारे संविधान ने हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार दिया है. लेकिन ऐसा लगता है कि गृह मंत्रालय इस अधिकार को खत्म करना चाहता है. दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है. गृह मंत्रालय ने ही एक दिन पहले पुराने कमिश्नर को हटाकर दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति की थी. अगर उनकी पहली बड़ी कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सख्ती करना है, तो यह चिंता की बात है. इससे लगता है कि सरकार संविधान से ज्यादा राजनीतिक आदेशों को महत्व दे रही है.
उन्होंने आगे कहा, “पहले महिला पहलवानों के प्रदर्शन में कार्रवाई हुई, फिर पूर्व सैनिकों के साथ भी सख्ती की गई. अब सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से भी यही संदेश मिलता है कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की समस्या मान रही है. यह दुख की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों को इस तरह दबाने की कोशिश हो रही है.”
बिगड़ती तबीयत के बाद अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक
इस बीच, जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को अनशन के 21वें दिन बिगड़ती तबीयत के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की गई.
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से भूख हड़ताल और शरीर में पानी की कमी के कारण वांगचुक काफी कमजोर हो गए हैं. हालांकि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार मेडिकल निगरानी और उपचार की जरूरत है.
पुलिस का दावा- कार्रवाई शांतिपूर्ण रही
दिल्ली पुलिस ने कहा कि अस्पताल ले जाने के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना. पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई अधिकतम संयम के साथ पूरी की गई. साथ ही प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर शांतिपूर्वक खाली करने की अपील भी की गई.
अभिजीत दीपके के आरोप, अनशन शुरू
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और कुछ समय के लिए हिरासत में रखा. उन्होंने देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए खुद भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया.
छात्र अब भी डटे, स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता
आंदोलन के 21वें दिन भी आइसा के सदस्य नेहा, आमीन और मनीष भूख हड़ताल पर बैठे रहे. संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने तीनों छात्रों के चारों ओर मानव शृंखला बनाकर उन्हें हटाने की कोशिश नाकाम कर दी. डॉक्टरों के अनुसार, तीनों छात्रों की सेहत लगातार बिगड़ रही है. नेहा का ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है, आमीन को शरीर में पानी की भारी कमी है और मनीष का वजन 10 किलो से ज्यादा घट चुका है.
इससे पहले सोनम वांगचुक ने वीडियो संदेश में कहा था कि 20 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान उनके शरीर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा क्षीण हो चुका है, लेकिन वह छात्रों के समर्थन में अपना अनशन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

