बीजिंग: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच चीन ने ताइवान को लेकर नई रणनीतिक चाल चली है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओंमिनतांग (KMT) की अध्यक्ष चैंग ली-वून बीजिंग में मिलकर की , जिसे एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उस रणनीति से मेल खाता है , जिसमें अमेरिका अक्सर किसी देश के अपनी पसंद की सरकार न होने पर विपक्षी नेताओं से संपर्क मज़बूत करता रहा है।
ताइवान के विपक्षी नेता से क्यों मिले जिनपिंग ?
ताइवान की विपक्षी नेता से मुलाकात को चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping का अहम राजनीतिक कदम माना जा रहा है। चीन लंबे समय से ताइवान पर अपना दावा करता रहा है और उसे अपना हिस्सा बताता है, जबकि ताइवान की मौजूदा सरकार इस दावे को लगातार खारिज करते आई है। माना जा रहा है कि विपक्ष के अपेक्षाकृत नर्म रुख का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। बैठक के दौरान शी ने कहा कि दोनों पक्षों के लोगों की साझा इच्छा शांति है। यह मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की अगले महीने प्रस्ताव चीन यात्रा से पहले हुई है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।
एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली पहली ताइवानी विपक्षी नेता बनीं चैंग ली
ताइवान की विपक्षी पार्टी KMT की अध्यक्ष चैंग ली-वून पिछले करीब एक दशक में चीन के दौरा करने वाली पहलह प्रमुख विपक्षी नेता बनीं हैं। चीन लगातार ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा बताते हुए उसके पुनः एकीकरण की बात दोहराता रहा है।बीजिंग जहां एक ओर सैन्य और कूटनीतिक दवाब बढ़ रहा है, वहीं KMT जैसे अपेक्षाकृत चीन समर्थक दलों के साथ संवाद भी मजबूत कर रहा है। मुलाकात के दौरान चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने कहा कि दोनों पक्षों के लोग एक ही सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हैं और शांति, विकास, संवाद व सहयोग ही साझा लक्ष्य है। उन्होंने ने भरोसा जताया कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग भविष्य में और करीब आएंगे और यह एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है।
चैंग ली ने टकराव से ऊपर उठने की अपील की
नवंबर 2016 के बाद पहली बार KMT अध्यक्ष और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच औपचारिक मुलाकात हुईं है, जिसे अहम कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। बैठक में चैंग ली-वून ने कहा कि दोनों पक्षों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर ताइवान जलडमरूमध्य के पार आपसी हितों पर आधारित सहयोग का रास्ता तलाशना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि युद्ध से बचने के लिए संस्थागत समाधान जरूरी है, ताकि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण विवाद समाधान का उदाहरण बन सके। चैंग ने अपनी छह दिवसीय चीन यात्रा को “शांति की यात्रा” बताया और शंघाई व नानजिंग में भी संवाद और स्थिरता पर जोर दिया।
