Ajay Rai

PM मोदी के लिए अजय राय के अपशब्द पर बीजेपी ने याद दिलाए पुराने दिन, सीएम योगी बोले- अब तो माफी मांग कर भी…

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राय ने राज्य स्थित महोबा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया है. अब उनके अपशब्द पर सीएम योगी समेत बीजेपी के कई नेताओं ने करारा पलटवार किया है. इतना ही नहीं बीजेपी के एक सांसद अजय राय को वह दिन भी याद दिलाया जब यूपीसीसी चीफ बीमार थे और पीएम मोदी ने उनके लिए मंगलकामना की थी.

राय के बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विषय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा की गई अभद्र, असंसदीय और अक्षम्य टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को प्रकट करती है. पूर्व में कांग्रेस के ‘युवराज’ भी अपने कुसंस्कार का परिचय दे चुके हैं. कांग्रेस अब हताशा, निराशा, कुंठा और मानसिक दिवालियेपन के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुकी है. अब देश वासियों से क्षमा मांगने लायक भी स्थिति उनकी नहीं रही है.

यूपी बीजेपी चीफ पंकज चौधरी ने लिखा कि जब होने लगे अंत की आहट तो आने लगी शब्दों में गिरावट… देश के लोकप्रिय एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की अभद्र टिप्पणी कांग्रेस की बौखलाहट, निराशा और राजनीतिक दिवालियेपन को दर्शाती है. बीमार होने पर जिस प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से अजय राय के स्वस्थ होने की कामना की थी, आज उसी जनसेवक को ये अपशब्द कह रहे हैं. दुकान ‘मोहब्बत’ की और नीयत इतनी कड़वी? जब जनता के हित, विकास कार्यों और राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचता, तब कांग्रेस के नेता मर्यादा भूलकर व्यक्तिगत टिप्पणी और अमर्यादित भाषा का सहारा लेते हैं. देश की जागरूक जनता ऐसे अपमानजनक व्यवहार का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देगी.

अरुण गोविल ने क्या कहा?
मेरठ से बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव राजनीतिक विरोधियों के प्रति भी सम्मान और शालीनता का परिचय दिया है. जब अजय राय अस्पताल में भर्ती थे, तब प्रधानमंत्री जी ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी. लेकिन आज अजय राय द्वारा प्रधानमंत्री जी के लिए सार्वजनिक रूप से प्रयोग की गई अभद्र भाषा न केवल राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है. जो लोग “मोहब्बत की दुकान” का दावा करते हैं, उन्हें पहले अपनी राजनीति और अपने नेताओं की भाषा में सभ्यता, संयम और सम्मान का स्थान सुनिश्चित करना चाहिए. भारत की राजनीति विचारों की लड़ाई हो सकती है, लेकिन भाषा की गिरावट कभी स्वीकार्य नहीं हो सकती.

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