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Bihar Chunav: प्रशांत किशोर ने Kanhaiya kumar को लेकर किया दावा… राजनीति में आने वाला है जबरदस्त भूकंप?

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को लेकर बड़ा दावा किया है. पीके ने कन्हैया कुमार को लेकर ऐसा दावा किया है, जिससे बिहार की राजनीति में भूकंप आ जाए तो हैरानी नही होगी. दरअसल प्रशांत किशोर ने बिहार बंद के दौरान बुधवार को पटना में कन्हैया कुमार के साथ हुए व्यवहार पर कांग्रेस नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला है. पीके के द्वारा कन्हैया कुमार की तरफदारी आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को बदल दे तो हैरानी नहीं होगी. 9 जुलाई 2025 को बिहार में महागठबंधन द्वारा आयोजित बिहार बंद और चक्का जाम के दौरान एक घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ एक वाहन में सवार होने से सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया. इस घटना ने महागठबंधन के भीतर आरजेडी के रुतबे को बताता है और कांग्रेस को बिहार में पिछल्लगू पार्टी का तमगा देता है. पीके ने सवाल किया है कि कांग्रेस की स्थिति बिहार में समझ जाइए कि सीडब्ल्यूसी के अमंत्रित सदस्य हैं कन्हैया कुमार और उनको मंच पर जगह नहीं मिलना आरजेडी को डर को बताता है.
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि आरजेडी का नेतृत्व कन्हैया कुमार जैसे प्रभावशाली नेताओं से डरता है. प्रशांत किशोर ने 10 जुलाई 2025 को सीतामढ़ी में कहा, ‘कन्हैया कुमार बिहार में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से हैं. वो चाहें कांग्रेस में हों लेकिन मुझे कहने में यह गुरेज नहीं है कि जितने भी नेता हैं उन सबों में अगर किसी में प्रतिभा है तो वह कन्हैया कुमार में हैं. अगर कांग्रेस उनका इस्तेमाल नहीं करती है तो ये दिखाता है कि कांग्रेस बिहार में आरजेडी और लालू-तेजस्वी की पिछल्लगू पार्टी है. आरजेडी का नेतृत्व कन्हैया कुमार जैसे लोगों से घबराता है. वह सोचता है कि कोई नया आदमी आ जाएगा तो हमारे नेतृत्व को चुनौती मिलेगा या हमारा पिछल्लगू बनकर वह हमेशा नहीं रहेगा. इसलिए आरजेडी नहीं चाहेगी कि कन्हैया कुमार जैसा लीडर कांग्रेस में रहे.’
क्या कन्हैया कुमार आएंगे पीके के साथ?
पीके ने आगे कहा, ‘राहुल गांधी के साथ तो बीसीयों लीडर गाड़ी पर खड़े थे. उसमें कन्हैया कुमार भी हो सकते थे. ये दिखाता है कि आरजेडी का नेतृत्व कहा होगा कि कन्हैया कुमार मंच पर नहीं होना चाहिए. जबकि, आपको बता दें कि कन्हैया कुमार सीडब्ल्यूसी में आमंत्रित सदस्य हैं कन्हैया कुमार. सीडब्ल्यूसी के मेंबर को आप नहीं चढ़ने दे रहे हैं. ये कांग्रेस की स्थिति को बताता है. इस बात को प्रमानित करता है कि कम से कम बिहार के नजरिए से कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है. ये बिहार में आऱजेडी का पिछल्लगू पार्टी है. जो राजद का नेतृत्व या लालू जी तय करते हैं कांग्रेस वाले बिहार में वही करते हैं.

राहुल के सामने में कन्हैया-पप्पू की गजब ‘बेइज्जती’, तेजस्वी यादव का बदला पूरा!
बता दें कि बुधवार को बिहार बंद का आयोजन निर्वाचन आयोग के विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में किया गया था. विपक्ष ने दावा किया कि यह प्रक्रिया प्रवासियों, दलितों, महादलितों और गरीबों के वोटिंग अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है. इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, सीपीआई के डी. राजा, और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के दीपंकर भट्टाचार्य जैसे नेता शामिल थे. लेकिन कन्हैया और पप्पू यादव को मंच पर जगह न मिलना चर्चा का विषय बन गया. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे कन्हैया की ‘बेइज्जती’ करार दिया. जबकि, कुछ ने इसे आरजेडी की रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य कन्हैया को बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा बनने से रोकना था.

पीके का दावा है कि कन्हैया कुमार से आरजेडी डरती है. शायद कांग्रेस बिहार में अपना अस्तित्व बचाने के लिए कन्हैया कुमार जैसे नेताओं को आरजेडी के सामने नीचा दिखा रही है. बता दें कि कन्हैया कुमार प्रखर वक्ता होने के साथ-साथ युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं. उनमें यही गुण बिहार में कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा बनाती है. लेकिन यह लोकप्रियता ही आरजेडी के लिए असहजता का कारण बनती है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट पर आरजेडी ने कन्हैया के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा था, जिसे कई लोगों ने तेजस्वी यादव की कन्हैया के प्रति असुरक्षा की भावना से जोड़ा था. लेकिन अब प्रशांत किशोर इस मौके को भुनाकर कन्हैया कुमार को अपने पाले में करना चाहते हैं. अगर वाकई में पीके इसमें कामयाब हो जाते हैं तो यह महागठबंधन की राजनीति में भूकंप के झटके के समान होगा, जिसकी भरपाई जल्दी नहीं हो सकती.
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

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