बिना एक रुपए खर्च किए मायावती ने कैसे महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया ?

Bihar Chunav Results 2025: बिहार चुनाव में NDA भारी बहुमत की ओर बढ़ रहा है, जबकि महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया. BSP ने बिना रैली और बिना खर्च के 1.59% वोट हासिल कर 57 सीटों पर RJD के वोट काटे. मायावती का शांत लेकिन प्रभावी वोट- बैंक महागठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हुआ.

बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर नतीजों का सिलसिला जारी है. NDA भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है. वहीं महागठबंधन करीब 35 सीटों पर सिमट गया है. इधर, मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 1.59% वोट हासिल किया है. आइए जानते हैं कि बिना एक रुपए खर्च किए मायावती ने महागठबंधन को कैसे नुकसान पहुंचाया.

  1. BSP का एक कैंडिडेट रामगढ़ सीट पर आगे

बिहार की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी सतीश कुमार यादव 889 वोटों से आगे चल रहे हैं. BSP आमतौर पर दलित, पिछड़े वर्ग और नाराज वोटरों में सेंध लगाने में सक्षम रहती है. रामगढ़ इसका उदाहरण बन गया. मायावती की पार्टी ने मजबूत ग्राउंड-लेवल कैडर और शांत प्रचार शैली के दम पर ये प्रभाव हासिल किया.

  1. महागठबंधन के वोट शेयर में सेंध

बसपा ने इस चुनाव में कुल 1.59% वोट हासिल किए, जो देखने में छोटा प्रतिशत लग सकता है, लेकिन कई क्षेत्रों में यह निर्णायक साबित हुआ. चुनावी विश्लेषण बताते हैं कि BSP ने 5 से 7 सीटों पर RJD के वोट बैंक में सेंध लगाई, जिससे महागठबंधन को सीधा नुकसान हुआ.

RJD को इस चुनाव में 22.84% वोट मिले, लेकिन कई सीटों पर BSP के उम्मीदवारों ने Yadav DalitOBC समीकरण को तोड़ दिया. वोटों की यह कटिंग महागठबंधन को हार की ओर धकेलने में अहम रही. खास बात यह है कि BSP ने उन इलाकों को टारगेट किया, जहां RJD परंपरागत रूप से मजबूत मानी जाती थी. वहां 24% वोट भी निर्णायक साबित हुए.

  1. मायावती और आकाश ने एक भी रैली नहीं की

BSP चीफ मायावती और उनके भतीजे आनंद ने बिहार बिहार चुनाव में एक भी रैली नहीं की, न ही बड़े रोडशो या महंगी चुनावी मुहिम चलाई. इसके बावजूद BSP ने 1.57% वोट लेकर अपने प्रभाव का अहसास कराया. इस नो-कैंपेन मोड के पीछे दो कारण माने जाते हैं. पहला BSP के पारंपरिक वोटरों का वफादार होना. दूसरा नाराज महागठबंधन समर्थकों का एक हिस्सा विकल्प की तलाश में था.

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