वेनेजुएला के पास दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ा तेल भंडार है। एक अनुमान के अनुसार, 2023 तक 303 बिलियन बैरल (Bbbl) के वेनेजुएला में तेल का सबसे बड़ा ज्ञात भंडार है। सऊदी अरब 267.2 Bbbl के साथ दूसरे स्थान पर है, उसके बाद ईरान 208.6 Bbbl और कनाडा 163.6 Bbbl पर है। ये चारों देश मिलकर दुनिया के आधे से ज्यादा तेल भंडार के मालिक हैं।
अमेरिका ने एक झटके में वेनेजुएला पर कब्जा कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को लेकर अमेरिकी विमान न्यूयॉर्क पहुंचा गया है। भले अमेरिका में नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को-आतंकवाद की साजिशों के आरोप में निकोलस मादुरो मुकदमा मुकदमा चलेगा, लेकिन जानकार कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। वैश्विक जानकारों का कहना है कि यह सब तेल खेल में अमेरिकी एंट्री की पटकथा का पार्ट है जो काफी समय से लिखा जा रहा था। कल अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला द्वारा अमेरिकी कंपनी को बाहार निकालने की बात की भी थी। अब वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जे से तेल के खेल में US की जबरदस्त तरह से एंट्री होगी क्योंकि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है।

वेनेज़ुएला चीन को सबसे अधिक कच्चे तेल की सप्लाई करता है। तो क्या अमेरिका वेनेजुएला के बहाने चीन को चुनौती देगा? आइए समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे एक नया एनर्जी वॉर शुरू होने वाला है और इसका असर चीन समेत दुनिया के देशों पर क्या होगा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका तेल कंपनियों की मदद से वेनेजुएला में “तेल का फ्लो वैसे ही करवाएगा जैसा होना चाहिए”। उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा मादुरो को पकड़े जाने से वेनेजुएला के विशाल, सरकारी तेल भंडार उन तेल दिग्गजों के लिए खुल जाएंगे, जिन्हें पहले एक्सेस से रोका गया था। ट्रंप ने कहा, “हम तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाएंगे, जिसमें अरबों डॉलर खर्च होंगे।” उन्होंने कहा कि यह खर्च “सीधे तेल कंपनियों द्वारा उठाया जाएगा,” लेकिन उन्हें “रीइम्बर्स” किया जाएगा। इससे साफ पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की मंशा क्या है?
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेजुएला के पास
वेनेजुएला के पास दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ा तेल भंडार है। एक अनुमान के अनुसार, 2023 तक 303 बिलियन बैरल (Bbbl) के वेनेजुएला में तेल का सबसे बड़ा ज्ञात भंडार है। सऊदी अरब 267.2 Bbbl के साथ दूसरे स्थान पर है, उसके बाद ईरान 208.6 Bbbl और कनाडा 163.6 Bbbl पर है। ये चारों देश मिलकर दुनिया के आधे से ज्यादा तेल भंडार के मालिक हैं।
इसकी तुलना में, संयुक्त राज्य अमेरिका के पास लगभग 55 Bbbl तेल है, जो उसे दुनिया में नौवें स्थान पर रखता है। इसका मतलब है कि वेनेजुएला का भंडार अमेरिका के भंडार से पांच गुना से भी ज्यादा बड़ा है।
क्यों अमेरिका के लिए जरूरी हो गया था वेनेजुएला?
वेनेजुएला एक ऐसा देश है, जो अमेरिका के काफी करीब है। वहीं वेनेजुएला के पास भारी और खट्टा कच्चा तेल है, जिससे डीजल और औद्योगिक ईंधन जैसे अहम पेट्रोलियम उत्पाद बनते हैं। अमेरिका का तेल हल्का है, उससे सीमित उत्पाद बनते हैं। अमेरिकी रिफाइनरियां खासतौर पर वेनेजुएला के तेल के लिए डिजाइन की गई हैं, इसलिए यह तेल अमेरिका के लिए ज्यादा जरूरी और उपयोगी है।
वेनेजुएला कितना तेल एक्सपोर्ट करता है?
ऑब्जर्वेटरी ऑफ इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी (OEC) के डेटा के अनुसार, वेनेजुएला ने 2023 में $4.05 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल एक्सपोर्ट किया। यह सऊदी अरब ($181 बिलियन), अमेरिका ($125 बिलियन), और रूस ($122 बिलियन) जैसे दूसरे बड़े एक्सपोर्टर्स से बहुत कम है।
कच्चे तेल के अलावा, वेनेजुएला गैसोलीन और डीज़ल जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कम मात्रा में एक्सपोर्ट करता है, लेकिन पुरानी रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी चुनौतियों और प्रतिबंधों के कारण ये इसकी क्षमता की तुलना में सीमित हैं।
वेनेजुएला के तेल का चीन है सबसे बड़ा खरीदार
वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। एक डेटा के अनुसार, दिसंबर में चीन में मेरे क्रूड की आवक 600,000 bpd से ज्यादा रही। वेनेजुएला का चीन के क्रूड इंपोर्ट का लगभग 4% हिस्सा है। इससे पता चलता है कि चीन के तेल मार्केट पर अमेरिकी कब्जे का क्या असर होने वाला है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कब्ज से पूरा एनर्जी मार्केट में बड़ा बदलाव आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की निगाह पहले से तेल मार्केट पर है। अब उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार मिल गया है। इसे वह अपने तरीके से चलाएंगे। इसका फौरी तौर पर असर चीन पर होगा लेकिन आने वाले समय में यह पूरे तेल मार्केट को प्रभावित करेगा।
क्या एनर्जी वॉर शुरू हो गया और क्या होगा असर?
21वीं सदी में युद्धों का चेहरा बदल चुका है। सीमाएं, सेनाएं और हथियार अब भी अहम हैं, लेकिन असली निर्णायक शक्ति ऊर्जा बन चुकी है। तेल, गैस और खनिजों पर नियंत्रण का अर्थ है, उद्योगों की रफ्तार, सैन्य क्षमता और भू-राजनीतिक दबदबा।
इसी पृष्ठभूमि में वेनेजुएला फिर से वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। अगर वेनेजुएला पर अमेरिका की निर्णायक पकड़ बनती है, तो चीन और दुनिया पर इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा?
‘अमेरिकी कब्जा’ का अर्थ सीधे सैन्य अधिग्रहण से अधिक राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक नियंत्रण से है। वेनेजुएला पर अगर अमेरिका निर्णायक भूमिका में आता है, तो तेल प्रवाह की दिशा बदल सकती है। चीन वेनेजुएला से मिलने वाले तेल को अपनी रिफाइनिंग क्षमता और औद्योगिक मांग के अनुसार इस्तेमाल करता है। अमेरिकी नियंत्रण बढ़ने की स्थिति में आपूर्ति अनुबंधों पर पुनर्विचार हो सकता है। शिपमेंट में देरी या कटौती से सप्लाई शॉक पैदा होगां इससे चीन को मध्य-पूर्व या अफ्रीका से महंगा विकल्प तलाशना पड़ेगा।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत जैसे बड़े आयातक के लिए यह स्थिति मिश्रित असर लाएगी। डीजल कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। हालांकि, बहुत ज्यादा असर होने की संभावना नहीं है।

