एक तरफ जहां ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बाहरी वातावरण का तापमान हर दिन बढ़ता जा रहा है वहीं, इंसान के शरीर का तापमान कम यानी ठंडा होता जा रहा है। साल 1851 में शरीर के स्टैंडर्ड औसत बॉडी टेंपरेचर को 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फैरनहाइट रखा गया था लेकिन तब से लेकर अब तक इसमें धीरे-धीरे कमी दर्ज की गई है। अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात की समीक्षा की और पाया कि साल 2000 में जन्मे पुरुषों के शरीर का तापमान 1800 में जन्मे पुरुषों की तुलना में औसतन 1.06 डिग्री फैरनहाइट कम है।

