Vinayak Chaturthi 2026

कब रखा जाएगा विनायक चतुर्थी 2026 का व्रत? यहां जानें तारीख, मुहूर्त और वर्जित चंद्र दर्शन का समय

प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी कहते हैं जबकि शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इन दोनों ही तिथि में गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है। आपको बता दें कि आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन अनिरुद्ध रूपी भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। जुलाई में अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का व्रत 18 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।

आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन अनिरुद्ध गणेश का पूजन एवं व्रत किया जाता है। भगवान गणेश के विभिन्न रूपों में से एक रूप अनिरुद्ध भी हैं। इस व्रत में सन्यासियों को तुम्बी दान करने का विधान है। विभिन्न हिन्दु धर्मग्रन्थों में आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी व्रत का माहात्म्य वर्णित किया गया है। यह व्रत मुख्यतः भगवान श्रीगणेश की आराधना को समर्पित होता है। शास्त्रों में चतुर्थी तिथि को गणपति की प्रिय तिथि के रूप में वर्णित किया गया है। चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश का पूजन कर व्रत करने से बुद्धि, स्मृति, विद्या और वाणी में तीव्रता आती है।

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और वर्जित चंद्र दर्शन का समय
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जुलाई को सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 18 जुलाई 2026 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट पर होगा। चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के दिन वर्जित चंद्र दर्शन का समय सुबह 9 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी व्रत महत्व
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन अनिरुद्ध गणेश का पूजन एवं व्रत किया जाता है। भगवान गणेश के विभिन्न रूपों में से एक रूप अनिरुद्ध भी हैं। इस व्रत में सन्यासियों को तुंबी दान करने का विधान है। आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी व्रत भगवान श्रीगणेश की आराधना को समर्पित होता है। शास्त्रों में चतुर्थी तिथि को गणपति की प्रिय तिथि के रूप में वर्णित किया गया है। चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में भगवान गणेश का पूजन कर व्रत करने से बुद्धि, स्मृति, विद्या और वाणी में तीव्रता आती है।

विनायक गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के निमित व्रत और पूजा करने से जीवन खुशियों से भर जाता है। कभी किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। साथ ही घर और बिजनेस में सुख-समृद्धि, सौभाग्य, धन-संपदा, ज्ञान और हर तरह के भौतिक सुख की प्राप्ति होती है।

विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा कैसे करें?
विनायक चतुर्थी दिन स्नान के बाद साफ कपड़े पहन लें। संभव हो तो इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनें।
इसके बाद मंदिर या पूजा घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
मूर्ति को साफ कपड़े से पोंछकर उस पर लाल रंग का कपड़ा रखें।
इसके बाद श्री गणेश का षोडशोपचार विधि से पूजन करके सिंदूर चढ़ाएं और आरती करें।
विनायक चतुर्थी के दिन इस व्रत कथा का पाठ भी जरूर करें तभी आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।
इस तरह पूजा के बाद श्री गणेश को उनके प्रिय लड्डूओं के प्रसाद का भोग लगाएं। बाद में इस प्रसाद को सब में बांट दें।
यहां एक बात ध्यान देने की है कि गणेश पूजा में कभी भी तुलसी पत्र इस्तेमाल नहीं करें।
विनायक गणेश चतुर्थी के दिन व्रत भी किया जाता है, लेकिन अगर आप व्रत नहीं कर पा रहें है तो गणपति जी की विधिवत पूजा जरूर करें।

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