प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को केंद्र सरकार ने बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहर में 43.218 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर और 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दे दी है। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आएगी। हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर आधारित इन मेगा प्रोजेक्ट्स के निर्माण के बाद काशी में सफर करने वाले स्थानीय लोगों, देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जाम के झंझट से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है।
बुधवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि नेशनल हाईवे-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच एक भव्य 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दी गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 46.039 किलोमीटर होगी, जिसे बनाने में करीब ₹14,447.64 करोड़ की लागत आएगी। यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर वाराणसी के रोड नेटवर्क को शानदार कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह इस प्रभाव क्षेत्र में वाहनों के औसत यात्रा समय को लगभग 60 मिनट से घटाकर मात्र 20 मिनट कर देगा। इससे शहर के प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
वरुणा नदी के किनारे बनेगा 43.2 किमी लंबा 6/4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर
वाराणसी शहर के अंदर भीड़भाड़ कम करने के लिए सरकार ने वरुणा नदी के किनारे एक और शानदार कॉरिडोर को मंजूरी दी है। यह 43.218 किलोमीटर लंबा एक 6/4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जो नेशनल हाईवे-31 और वाराणसी रिंग रोड को सीधे जोड़ेगा। इस बेहद महत्वपूर्ण शहरी प्रोजेक्ट पर कुल ₹10,998.32 करोड़ की लागत आएगी।
काशी रेलवे स्टेशन को मिलेगी सीमलेस कनेक्टिविटी
वाराणसी डीकंजेस्ट प्लान के हिस्से के रूप में बनने वाला यह दूसरा कॉरिडोर NH-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच सीमलेस कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसके चालू होने के बाद NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा के समय में सीधे 50% की कमी आएगी, जिससे 40 मिनट का सफर सिमटकर केवल 20 मिनट का रह जाएगा। इसके साथ ही, यह कॉरिडोर क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार देगा। यह मार्ग चंदौली सोशल इकोनॉमिक जोन, चंदौली और छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स नोड्स के साथ कनेक्टिविटी को काफी मजबूत करेगा, जिससे व्यापार और माल ढुलाई में तेजी आएगी।

