धनबाद में राष्ट्रीय दलों का रहा दबदबा, संघर्ष कांग्रेस व भाजपा के बीच

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लगभग चार लाख मतदाता वाले कोयलांचल यानि धनबाद विधानसभा क्षेत्र पर हमेशा राष्ट्रीय दलों का ही दबदबा रहा है। कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस के प्रत्याशी ही यहां से जीतते रहे हैं। शहरी आबादी ज्यादा होने के कारण यहां क्षेत्रीय दलों का प्रभाव नहीं के बराबर रहा है। वर्ष 1952 में ही धनबाद विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया।

शुरुआत में यहां कांग्रेस का दबदबा था. वर्ष 1977 में जब पूरे देश में कांग्रेस विरोधी लहर चल रही थी। तब भी धनबाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के योगेश्वर प्रसाद योगेश विजयी हुए थे। इसके बाद 1980,85, 90 में भी यहां कांग्रेस के प्रत्याशी लगातार जीतते रहे। वर्ष 1995 में BJP के पशुपति नाथ सिंह ने जीत हासिल कर यहां कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगायी। श्री पशुपति नाथ सिंह लगातार 3 बार यहां से जीते. वर्ष 2009 में कांग्रेस के प्रत्याशी मन्नान मल्लिक ने भाजपा के राज सिन्हा को हराया।

2014 में भाजपा के राज सिन्हा जीत गये. शहरी क्षेत्र होने के कारण धनबाद विधानसभा क्षेत्र में किसी एक जाति या वर्ग का दबदबा कभी नहीं रहा है। यहां हर वर्ग के मतदाता हैं। संगठित व असंगठित मजदूरों की भी खासी संख्या है। यहां बड़ी संख्या में वैसे मतदाताओं की भी है, जो मूल रूप से बिहार या अन्य प्रदेश से आकर शहर में बस गए हैं।

2005, जीते : पीएन सिंह, BJP, प्राप्त मत :  83692

हारे : मन्नान मल्लिक, कांग्रेस, प्राप्त मत : 62012

तीसरा स्थान  :  हालिम अंसारी, RJD, प्राप्त मत : 6191

2009, जीते : मन्नान मल्लिक, कांग्रेस, प्राप्त मत :  55641

हारे :राज कुमार सिन्हा, BJP, प्राप्त मत : 54751

तीसरा स्थान  : नीरज सिंह , निर्दलीय, प्राप्त मत : 17800

2014, जीते : राज सिन्हा, BJP, प्राप्त मत :  132091

हारी : मन्नान मल्लिक, कांग्रेस, प्राप्त मत : 79094

तीसरा स्थान  :रमेश कुमार राही, JVM, प्राप्त मत : 4195

सौजन्य:- रेणुका त्रिवेदी (ब्यूरो प्रमुख-रांची)

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