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तपते मार्च की जगह ओले-बरसात क्यों? अब अप्रैल-मई में कैसा रहेगा मौसम?

मार्च 2026 भारत के मौसम का सबसे अजीब महीना रहा. जहां हर साल अप्रैल-मई से पहले गर्मी चढ़ने लगती है, वहां इस बार 8 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ ने पूरे देश को ठंडक, बारिश, ओले और आंधी-बिजली से भर दिया. नतीजा- 45 लोगों की मौत और किसानों की फसलें बर्बाद. भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट कहती है कि यह राहत आगे मुसीबत बन सकती है. लेकिन कैसे? आइए एक्सप्लेनर में समझते हैं…

सवाल 1: मार्च में तपती गर्मी की जगह ओले-बारिश क्यों आई? क्या यह नॉर्मल है?

जवाब: नहीं. मार्च में आमतौर पर 5 से 6 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं, लेकिन इस बार पूरे 8 आए. इनमें से 6 ने 11 से 31 मार्च के बीच खासतौर पर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत को प्रभावित किया. IMD चीफ मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि इन विक्षोभों ने ठंडी हवाएं, नमी और बादल बनाए, जिससे हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक के साथ आंधी, तेज हवाएं (30-50 किमी/घंटा) और ओले पड़े.

उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान में अधिकतम तापमान 16 से 22 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. पूर्वी और मध्य भारत में भी भारी बारिश हुई. शुरुआत में मार्च के पहले हफ्ते में गर्मी थी और कुछ जगहों पर हीटवेव जैसी स्थिति तक बन गई थी, लेकिन दूसरे हफ्ते से विक्षोभों ने सब बदल दिया.

IMDB के मुताबिक, यह नॉर्मल नहीं था. विक्षोभों की संख्या और तीव्रता ज्यादा थी, जिससे मौसम बहुत तेजी से पलट गया. मौसम एक्सपर्ट्स की मानें तो इसे यह क्लाइमेट चेंज की वजह से हुआ, क्योंकि आर्कटिक से जेट स्ट्रीम प्रभावित हो रही है, जिससे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का पैटर्न बदल रहा है.

सवाल 2: तो क्या अब अप्रैल-जून में सबसे तेज गर्मी के दिन शुरू होंगे?

जवाब: राहत अब खत्म होने वाली है, लेकिन पूरी तरह नहीं. IMD की अप्रैल-जून 2026 की सीजनल आउटलुक के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में सामान्य या उससे नीचे तापमान रहने की संभावना है. खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ इलाकों में, लेकिन पूर्वी भारत, नॉर्थ-ईस्ट, पूर्वी मध्य भारत और दक्षिण के पूर्वी हिस्सों में मौसम ज्यादा गर्म रह सकता है.

इसमें चौंकाने की बात यह है कि महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में दिन से ज्यादा गर्म रातें रहेंगी. राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तटीय तमिलनाडु और कर्नाटक के उत्तरी हिस्सों में हीटवेव की चेतावनी है.

IMDB के मुताबिक, मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है. आमतौर पर 3 से 5 दिन हीटवेव आती है, लेकिन इस बार इन राज्यों में 2 से 8 दिन ज्यादा हो सकते हैं.

IMD ने साफ कहा है कि अप्रैल में अभी भी कई जगहों पर ऊपर सामान्य बारिश की संभावना है, जिससे गर्मी थोड़ी देर से चढ़ेगी, लेकिन मई-जून में हीटवेव तेज हो सकती है.

सवाल 3: इस मौसमी राहत के पीछे मुसीबत तो नहीं?

जवाब: हां, राहत के साथ मुसीबत भी आई है. IMD के मुताबिक, 45 मौतें हुईं, जिनमें 32 मौतें यूपी, बिहार, झारखंड, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, छत्तीसगढ़ और केरल में बिजली गिरने से हुईं. ओले, तेज हवाएं और गरज-चमक ने पूरे देश में आफत मचाई.

सबसे बड़ा झटका रबी फसल को लगा, खासकर गेहूं और सरसों की फसलों को. मार्च-अप्रैल गेहूं की कटाई का पीक टाइम होता है, लेकिन ओले और तेज हवाओं ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के खेतों को तबाह कर दिया. ओलों ने खड़ी फसलें कुचल दीं, दाने खराब कर दिए.

तेज हवाओं ने फसलें गिरा दीं और नमी बढ़ने से दाने अंकुरित हुए और फंगस लगने से बर्बादी. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब-हरियाणा-यूपी में 6-8% तक गेहूं उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इससे फसलों की क्वालिटी कमजोर होगी और बढ़ती कीमतों की वजह बन जाएगी.

बारिश से गेहूं की फसलें तबाह हो गईं
IMD और कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि बारिश ने शुरुआती गर्मी से फसल बचाई, लेकिन ओले और बारिश ने नुकसान किया. आगे अगर गर्मी तेज हुई तो सिंचाई की समस्या बढ़ेगी. किसानों को फसल बीमा चेक करने और सरकारी मदद लेने की सलाह दी जा रही है. कुल मिलाकर, यह नुकसान खाद्य सुरक्षा और महंगाई दोनों पर असर डाल सकता है.

IMD का पूरा मॉनसून फोरकास्ट मिड-अप्रैल में आएगा, लेकिन उसके बाद एल नीनो की संभावना बढ़ रही है, जो मानसून को कमजोर या अनियमित बना सकता है. मतलब आगे सूखा, बाढ़ या अनियमित बारिश का खतरा. क्लाइमेट चेंज के कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का नेचर बदल रहा है. यह ‘वाइल्ड स्विंग’ मौसम का नया पैटर्न बन सकता है.

सवाल 4: यह सुहाना मौसम आपकी सेहत पर क्या असर डालेगा?

जवाब: मार्च की सबसे बड़ी सेहत समस्या बिजली गिरना था और अब अप्रैल-मई में हीटवेव का खतरा बढ़ेगा. दिन और रात के तापमान का गैप कम होने से शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और हार्ट पेशेंट्स पर पड़ सकता है. IMD ने हिदायत दी है कि लू लगने से बचें, ज्यादा पानी पिएं, दोपहर में बाहर न निकलें, हल्के कपड़े पहनें. अभी भी आंधी-बिजली वाले दिनों में घर के अंदर रहें, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स से दूर रहें.

सवाल 5: इस मौसम के भयानक नतीजे क्या होंगे?

जवाब: IMD की रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि अप्रैल-जून में हीटवेव ज्यादा होगी, लेकिन अप्रैल में बारिश का मौसम बना रह सकता है. फिर भी फसल नुकसान से गेहूं की कीमतें बढ़ सकती हैं. अगर एल नीनो आया तो मानसून प्रभावित होगा, जिससे कहीं पर सूखा तो कहीं पर बाढ़ आएगी. लंबे समय में क्लाइमेट चेंज से ऐसे स्विंग बढ़ सकते हैं.

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