CHINA

भारत आ रहा ईरानी तेल से भरा जहाज चीन की ओर क्यों मुड़ा? केंद्र सरकार ने दिया जवाब

भारत सरकार ने शनिवार को उन रिपोर्ट्स को झूठा बताया, जिसमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चे तेल से भरा एक टैंकर जो पहले भारत आने वाला था, वो अब पेमेंट से जुड़ी दिक्‍कतों’ के कारण बीच रास्ते में अपना रुख बदलकर चीन की ओर बढ़ रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि कच्चे तेल के आयात को सुरक्षित करने में भारत को पेमेंट संबंधी कोई दिक्कत नहीं आई है. भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. कंपनियों को अलग-अलग जगहों से तेल खरीदने की पूरी आजादी है.

चीन की ओर क्यों मुड़ा ईरानी जहाज?

मिनिस्‍ट्री ऑफ पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की ओर से बयान में कहा गया कि रिपोर्ट्स में इस बात को नजरअंदाज किया गया कि तेल व्यापार कैसे काम करता है. मंत्रालय ने कहा, बिल ऑफ लैंडिंग में अक्सर शिप से सामान उतारने के लिए संभावित पोर्ट के नाम लिखे होते हैं. समुद्र में चल रहे कार्गो शिप बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए ऑपरेशनल फ्रीडम के आधार पर अपना गंतव्य बदल सकते हैं.’

सरकार ने मीडिया रिपोर्ट्स को झूठा बताया

मंत्रालय ने कहा, ‘मिडिल ईस्ट सप्लाई की समस्याओं के वावजूद भारत ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की जरूरत को पूरा कर लिया है. कई रिपोर्ट्स में पेमेंट संबंधी समस्याओं का जिक्र किया जा रहा है वो झूठ है. आने वाले महिनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरत पूरी तरह से सुरक्षित है.’ एलपीजी आपूर्ति को लेकर फैली अफवाह पर सरकार ने कहा, ‘सी बर्ड नाम का एलपीजी जहाज करीब 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी गैस लेकर 2 अप्रैल को मंगलुरु पोर्ट पर पहुंच चुका है और फिलहाल अनलोडिंग जारी है.’

गुजरात पहुंचने वाला था ईरानी जहाज?

जहाज ट्रैकिंग कंपनी ‘कप्लर’ ने दावा किया कि ‘पिंग शुन’ नाम का अफ्रामैक्स टैंकर गुजरात के वाडिनार के बजाय अब अपना गंतव्य चीन के दोंगयिंग की ओर बढ़ रहा है. हाल ही में अमेरिका द्वारा दिए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के बाद भारतीय रिफाइनर समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुछ खेप खरीदने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. कप्लर के रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग विभाग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रिटोलिया ने दावा किया था कि जहाज के गंतव्य में बदलाव का कारण भुगतान से जुड़ी शर्तें हो सकती हैं. वाडिनार में रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की दो करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी स्थित है.

ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है भारत

रिटोलिया ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के साथ यात्रा के दौरान गंतव्य बदलना असामान्य नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि अब व्यापारिक शर्तें एवं वित्तीय जोखिम भी लॉजिस्टिक्स जितने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं. भारत का तेल मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि ईरानी तेल की खरीद फिर शुरू करने का फैसला तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा. भारत ऐतिहासिक रूप से ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बिहार के इन 2 हजार लोगों का धर्म क्या है? विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है? दंतेवाड़ा एक बार फिर नक्सली हमले से दहल उठा SATISH KAUSHIK PASSES AWAY: हंसाते हंसाते रुला गए सतीश, हृदयगति रुकने से हुआ निधन India beat new Zealand 3-0. भारत ने किया कीवियों का सूपड़ा साफ, बने नम्बर 1