Keshav Dwadashi 2025 Tithi

कब मनाई जाएगी केशव द्वादशी? जानिए सही डेट, पूजा विधि और महत्व

Keshav Dwadashi 2025: मार्गशीर्ष माह सनातन धर्म का महत्वपूर्ण और पावन महीना है. इसी महीने में भगवान श्रीकृष्ण से महाभारत के युद्ध के समय कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता उपदेश दिया था. इसलिए ये कहा जाता है कि मार्गशीर्ष मास की हर तिथि शुभ फल प्रदान करती है. इसी माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को केशव द्वादशी मनाई जाती है.

इस दिन भगवान विष्णु के केशव रूप की भक्ति की जाती है. साथ ही व्रत किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल केशव द्वादशी कब मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं पूजा विधि और केशव द्वादशी का महत्व.

केशव द्वादशी 2025 तिथि (Keshav Dwadashi 2025 Tithi)
इस साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 01 दिसंबर को शाम 07 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन दोपहर 03 बजकर 57 मिनट पर हो जाएगा. पारण का समय 3 दिसंबर की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से 09:03 मिनट तक रहने वाला है. इस दिन मत्स्य द्वादशी और अरण्य द्वादशी का समन्वय भी बनता है. इस वजह से ये दिन और अधिक शुभ फल देने वाला माना जाता है.

केशव द्वादशी पूजा विधि (Keshav Dwadashi Puja Vidhi)
केशव द्वादशी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर कर शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए. फिर पूजा-स्थान में भगवान विष्णु या शालिग्राम की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. इसके बाद उनको गंध, पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य चढ़ाना चाहिए. केशवाय नमः मंत्र का जप करना चाहिए. भजन-कीर्तन करना चाहिए. अगले दिन त्रयोदशी को खीर, नारियल और दक्षिणा दान करनी चाहिए.

केशव द्वादशी का महत्व (Keshav Dwadashi Significance)
पुराणों के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने केशी नाम के रक्षस का अंत किया था. इसके बाद ही वो केशव नाम से जाने जाते हैं. इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है. इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से साहस, संकल्प शक्ति और नकारात्मकता पर विजय मिलती है.

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