Holika Dahan

पाकिस्तान और बांग्लादेश में किस दिन होगी होली, 2 या 3 मार्च… वहां कैसे निकालते हैं मुहूर्त? जानें

कुछ दिन में होली आने वाली है, लेकिन होली की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच थोड़ी उलझन बनी हुई है. कहीं 2 मार्च को होलिका दहन की बात हो रही है तो कहीं 3 मार्च को होली का दहन मनाने की बातें कहीं जा रही है. वहीं भारत में पंचांग और ग्रह नक्षत्र के आधार पर होली की तिथि तय की जाती है. लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि भारत में तो ग्रह नक्षत्र के आधार पर होली की तिथि तय की जाती है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में होली किस दिन मनाई जाएगी और वहां मुहूर्त कैसे निकाला जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में दो या तीन मार्च किस दिन होली होगी और वहां मुहूर्त कैसे निकालते हैं.

पूर्णिमा की तिथि के अनुसार मनाई जाती है होली

होलिका दहन हमेशा फाल्गुन पूर्णिमा की रात को किया जाता है. तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय के आधार पर अलग-अलग जगह पर होलिका दहन की तारीख तय होती है. इस साल पूर्णिमा 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक मानी जा रही है. वहीं 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का भी असर बताया गया है, जिस वजह से कई जगह रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी. इसके अलावा आपको बता दें कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिंदू समुदाय चंद्र कैलेंडर के अनुसार ही तिथि तय करते हैं वहां के मंदिरों और स्थानीय धार्मिक संगठनों की ओर से सूर्यास्त के बाद का समय देखकर होलिका दहन का मुहूर्त निकाला जाता है.

पाकिस्तान में कब और कैसे मनाई जाती है होली?

पाकिस्तान में होली मुख्य रूप से सिंध प्रांत में मनाई जाती है. इस साल वहां 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 3 मार्च की शाम को किया जाएगा. वहीं पाकिस्तान में सबसे बड़ा आयोजन कराची शहर में होता है. यहां ऐतिहासिक श्री स्वामीनारायण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं. होलिका दहन के बाद भजन कीर्तन, रंगों का खेल और सामूहिक भोजन का आयोजन किया जाता है. जबकि सिंध के मीठी शहर को हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. वहीं लाहौर, रावलपिंडी और मुल्तान में भी छोटे स्तर पर होली का कार्यक्रम होता है. पाकिस्तान के मुल्तान का ऐतिहासिक संबंध Prahladpuri Temple से जोड़ा जाता है. जिसे प्रहलाद की कथा से संबंधित माना जाता है.

बांग्लादेश में डोल पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है होली

बांग्लादेश में होली को डोल पूर्णिमा या डोल यात्रा कहा जाता है. वहां भी 3 मार्च की शाम होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों का उत्सव मनाया जाएगा. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इस्कॉन ढाका और ढाकेश्वरी नेशनल टेंपल जैसे मंदिरों में विशेष पूजा-कीर्तन और रंग अर्पण कार्यक्रम होते हैं. यहां पर श्रद्धालु-राधा कृष्ण की प्रतिमाओं को झूले पर विराजमान कर गीत गाते हैं और गुलाल अर्पित करते हैं. इसके अलावा बांग्लादेश के चिटगांव और सिलहट जैसे शहरों में भी सामुदायिक स्तर पर होली मनाई जाती है. वहीं बताया जाता है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी होली की तिथि फाल्गुन पूर्णिमा के आधार पर तय होती है. सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल को देखकर होलिका दहन का समय चुना जाता है.

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