Phansidewa Election: पश्चिम बंगाल में नार्थ में स्थित फांसीदेवा सीट भौगोलिक, राजनीतिक और जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यहां के सियासी समीकरण चुनाव-दर-चुनाव बदलते रहते हैं। इसकी सीमाओं की बात करें तो फांसीदेवा, दार्जिलिंग जिले का भाग है। यह सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहत संवेदनशील है। इसका पश्चिमी सिरा पर नेपाल और पूर्वी छोर बांग्लादेश को छूता है।
अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए रिजर्व है सीट
फांसीदेवा सीट, फांसीदेवा और खोरीबाड़ी ब्लॉक को मिलाकर बनती है। यह सीट अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग के लिए रिजर्व है। फांसीदेवा की जनसंख्या का करीब 30 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जनजाति और लगभग 29 प्रतिशत भाग अनुसूचित जाति यानी SC का है।
कृषि और चाय के बागानों पर निर्भर है इकोनॉमी
फांसीदेवा विधानसभा सीट की डेमोग्राफी की बात करें तो करीब 59.7 प्रतिशत हिंदू, 23.6 फीसदी मुस्लिम और 16.2 प्रतिशत ईसाई जनसंख्या है। यहां आदिवासी समुदाय और चाय बागान के मजदूरों में ईसाई धर्म मानने वालों की काफी तादाद है। फांसीदेवा की इकोनॉमी प्रमुख रूप से एग्रीकल्चर और चाय के बागानों पर डिपेंड है।
दिलचस्प रहा था 2021 का चुनाव
विधानसभा चुनाव 2021 में फांसीदेवा विधानसभा सीट पर बड़ा उलटफेर दिखा था। यहां BJP की दुर्गा मुर्मू 1 लाख 5 हजार 651 वोट पाकर जीत गई थीं। यहां दूसरे नंबर पर TMC के छोटन किस्कू रहे थे। उन्हें 77 हजार 940 वोट मिले थे। यहां तीसरे नंबर पर कांग्रेस रही थी। उसके उम्मीदवार सुनील चंद्र तिर्की को 12 हजार 815 वोट हासिल हुए थे।
फांसीदेवा में BJP का उदय
साल 2021 में फांसीदेवा विधानसभा सीट BJP ने पहली बार जीत दर्ज की। यह नॉर्थ बंगाल में BJP की मजबूत होती स्थिति और आदिवासी मतदाताओं के सत्तारूढ़ TMC और लेफ्ट पार्टियों से मोहभंग का एक बड़ा इशारा था। 2016 में यहां कांग्रेस के सुनील चंद्र तिर्की ने TMC उम्मीदवार को हराया था, लेकिन 2021 के चुनाव में कांग्रेस का वोट बैंक यहां खिसक गया।
फांसीदेवा के स्थानीय और चुनावी मुद्दे
फांसीदेवा विधानसभा सीट के प्रमुख स्थानीय मुद्दे चाय बागान के मजदूर हैं। उत्तर बंगाल की सियासत में चाय बागान हमेशा फोकस में रहते हैं। जमीन के पट्टे, मजदूरों की दिहाड़ी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं यहां हर इलेक्शन का मुख्य मुद्दा रहती हैं।
बांग्लादेश और नेपाल से सीमा सटी होने की वजह से यहां तस्करी, घुसपैठ और डेमोग्राफी में बदलाव की चिंताएं हैं। आदिवासी पहचान, एजुकेशन और रोजगार के मुद्दे भी फांसीदेवा विधानसभा सीट पर चुनाव की दिशा और दशा तय करते हैं।

