पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव का ऐलान कभी भी हो सकता है। प्रदेश में मार्च-अप्रैल में चुनाव संभावित है। टीएमसी और बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। शांतिपुर सीट पर चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। शांतिपुर नादिया जिले में आता है और यह पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से एक है। शांतिपुर नादिया के सबसे पुराने शहरी सेंटर में से एक है और इसका इतिहास बहुत लंबा है।
शांतिपुर विधानसभा का इतिहास
शांतिपुर के लोगों ने 17 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के लिए वोट किया था और 2 मई को नतीजे आए थे। शांतिपुर, नादिया ज़िले के राणाघाट सबडिवीजन में एक म्युनिसिपल शहर है। यह एक जनरल कैटेगरी का असेंबली चुनाव क्षेत्र है, जहां दशकों से अलग-अलग पार्टियां आती-जाती रही हैं। यहां के लोगों का झुकाव पहले कांग्रेस की तरफ़ रहा है। हाल के सालों में बीजेपी यहां लगातार एक बड़ी ताकत के तौर पर उभर रही है और तृणमूल कांग्रेस इसकी मुख्य चुनौती है।
शांतिपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास
1951 में बना शांतिपुर चुनाव क्षेत्र पूरी शांतिपुर म्युनिसिपैलिटी और शांतिपुर कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतों को कवर करता है। यहां अब तक 19 बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2014 और 2021 में हुए दो उपचुनाव शामिल हैं। कांग्रेस नौ बार, रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया चार बार, इंडिपेंडेंट कैंडिडेट दो बार, तृणमूल कांग्रेस दो बार उपचुनाव में और CPI और BJP एक-एक बार जीती हैं। शांतिपुर में 2026 का असेंबली इलेक्शन BJP और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है। तृणमूल ने अब तक यहां सिर्फ उपचुनाव जीते हैं। तृणमूल को शांतिपुर में अभी तक कोई रेगुलर असेंबली इलेक्शन जीतना बाकी है।
शांतिपुर में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में यह सीट बीजेपी जीती थी। इसी साल यहां पर उपचुनाव हुआ जिसमें टीएमसी को जीत मिली थी। 2016 से 1991 तक हुए विधानसभा चुनावों में यह सीट कांग्रेस जीतती रही। 1987 और 1982 में यह सीट निर्दलीय ने जीती थी। इस साल बीजेपी और टीएमसी के बीच एक बार फिर से कड़ा मुकाबला देखा जा सकता है। जबकि कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाना चाहेगी।

