West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल के करीमपुर निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमा गया है। सभी दलों के संभावित उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं। इस सीट पर मौजूदा समय में टीएमसी का कब्जा है। इस साल होने वाले चुनाव में टीएमसी को कड़ी टक्कर मिलेगी। बीजेपी के अलावा, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां टीएमसी की उम्मीदों पर पानी फेरने की कोशिश करेंगी। जबकि हुंमायू कबीर की पार्टी भी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
करीमपुर के बारे में जानें
करीमपुर निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के अंतगर्त आता है। 1951से एक जनरल कैटेगरी का असेंबली चुनाव क्षेत्र रहा है। यह इलाका मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट के अंतगर्त आता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित है। यहां के ज्यादातर लोग खेती कर अपना जीविकोपर्जन करते हैं। करीमपुर में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान, गेहूं, जूट, आलू, गन्ना, सरसों, दालें और तिलहन हैं। सभी गांवों में बिजली और पीने का पानी है। इस इलाके में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं।
करीमपुर सीट का चुनावी इतिहास
करीमपुर की राजनीति कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के दबदबे से पहचानी जाती है। अब तक 18 असेंबली चुनावों में नौ बार सीपीआई एम ने जीत हासिल की है। 1977 से 2006 तक लगातार सीपीआई एम यहां से जीतती रही है। ममता बनर्जी के उभार के बाद इस इलाके के लोग टीएमसी पर भरोसा जताने लगे। बीजेपी के मजबूत होने के बाद से टीएमसी को यहां पर कड़ी टक्कर मिल रही है।
करीमपुर में CPI(M) के समरेंद्रनाथ घोष अपनी पार्टी से आखिरी बार जीते थे। उन्होंने 2011 में तृणमूल के रामेन सरकार को 5,085 वोटों से हराया था। 2016 में बड़ा उलटफेर उस समय हुआ जब टीएमसी की महुआ मोइत्रा ने घोष को 15,989 वोटों से हराया। जब मोइत्रा 2019 में लोकसभा गईं, तो बिमलेंदु सिन्हा रॉय ने बीजेपी के जयप्रकाश मजूमदार को 23,910 वोटों के मार्जिन से हराकर तृणमूल के लिए सीट बरकरार रखी। टीएमसी यह सीट 2021 और 2016 में जीती। जबकि 2011, 2006, 2001, 1996, 1991 में लगातार सीपीआई एम यहां से जीती।

