ब्रज क्षेत्र में होली का नाम सुनते ही हर किसी के चेहरे पर मुस्कान दौड़ जाती है, और जब बात बांके बिहारी मंदिर में मनाई जाने वाली फूलों की होली की आती है, तो यह किसी भी परम सुख से कम नहीं है. दरअसल यह पारंपरिक होली केवल रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के दिव्य प्रेम का प्रतीक है. इस साल वृंदावन में फूलों की होली 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.
आइए जानते हैं वृंदावन में फूलों से होली खेलने के पीछे का क्या खास कारण है जो इसे इतना अनोखा और दुनिया भर में इतना लोकप्रिय बना देता है. बांके बिहारी मंदिर में दिव्य फूलों की होली 28 फरवरी 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी.
वृंदावन में फूलों की होली का उत्सव द्वापर युग से चलता आ रहा है, जब भगवान कृष्ण राधा रानी और प्रिय गोपियों के साथ फूलों का इस्तेमाल करके होली खेला करते थे. आज भी जब बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं, तो ऐसा लगता है मानो खुद भगवान कृष्ण उनपर अपना प्यार बरसा रहे हैं.
पुष्प होली मानने का खास कारण यह है कि, इसे पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है. गुलाल या रसायनों के बजाए गुलाब, गेंदा और चमेली के फूलों का उपयोग रिश्तों की कोमलता को सुंगधित करने के साथ ताजगी से भर देता है. मान्यताओं के मुताबिक, इन फूलों की सुंगध और स्पर्श भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को काफी प्रिय है.
ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का फूलों से श्रृंगार करना बेहद ही खास अनुष्ठान है. इसलिए ब्रज में फूलों से होली खेलने की खास परंपरा रही है. फूलों की होली के पवित्र मौके पर भक्त और गोसई जी ठाकुर श्री बांके बिहारी लाल के साथ मनमोहक होली खेलते हैं और भक्ति में लीन रहते हैं.

