UP: मुस्लिम, यादव और कुर्मी को धमका रही पुलिस… वोटिंग से पहले सपा ने लगाए आरोप

यूपी के अंबेडकरनगर से सपा सांसद लालजी वर्मा ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि कटेहरी विधानसभी सीट पर मतदान से वंचित रहने का दबाव बनाया जा रहा है. मतदाताओं को चेतावनी वाली लाल पर्चियां बांटी जा रही हैं. इसमें खासकर मुस्लिम, यादव कुर्मी जाति के लोग धमकाया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए बुधवार यानी 20 नवंबर को वोटिंग करवाई जाएगी. वोटिंग से पहले सियासी पारा चढ़ा हुआ है. समाजवादी पार्टी ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि अंबेडकरनगर की कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में वोटरों को धमकाया जा रहा है और उन्हें मतदान से वंचित रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. इस संबंध में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल खड़ा किया है और चुनाव आयोग से कहा है कि वह इस मामले में तुरंत एक्शन ले.

अंबेडकरनगर से सांसद लालजी वर्मा ने अंबेडकरनगर पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘विधानसभा उपचुनाव के लिए पुलिस की ओर से सपा के समर्थकों का उत्पीड़न किया जा रहा है. उन्हें लाल पर्चा देकर मतदान से वंचित रहने का दबाव डाला जा रहा है, विशेष रूप से मुस्लिम, यादव और कुर्मी जाति के लोगों को धमकाया जा रहा है. ये लोकतंत्र के लिए घातक है.’

मेरा पुलिस से भरोसा समाप्त हो गया- लालजी वर्मा

एसपी को लिखे पत्र में उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे ये विश्वास था कि आपकी ओर से अंकुश लगाया जाएगा, लेकिन इस उत्पीड़न पर अंकुश लगाने की जगह उसे और बल दिया जा रहा है. अल्पसंख्यक मतदाताओं को अधिक भयभीत किया जा रहा है, जिससे मतदान न कर सकें. बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है. मुझे उम्मीद है कि पुलिस के उत्पीड़न पर अंकुश लगाने की कार्रवाई करेंगे जिससे वोटर निर्भीक होकर वोट कर सकें.’ वहीं, उन्होंने अपने गनर को लेकर भी संदेह किया है. लालजी वर्मा ने कहा, ‘मैं अपना गनर वापस छोड़ रहा हूं. मेरा पुलिस से भरोसा समाप्त हो गया.’

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

इस मामले पर सपा प्रमुख ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘चुनाव आयोग तुरंत इस बात का संज्ञान ले कि उत्तर प्रदेश में शासन-प्रशासन पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रहा है और मतदान को बाधित करने के लिए नोटिस-चेतावनी के लाल कार्ड बांटकर मतदाताओं पर दबाव बना रहा है. ये एक तरह से संविधान द्वारा दिए गए वोटिंग के अधिकार को छीनने का गैर-कानूनी कृत्य है. इसे एक अपराध की तरह दर्ज करके तुरंत कार्रवाई की जाए अन्यथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय से ये अपील होगी कि वो स्वतः संज्ञान लेते हुए पक्षपाती शासन-प्रशासन को निष्पक्ष चुनाव कराने का निर्देश दे.’

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